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Mahashivratri Special Yoga: भगवान शिव से जुड़े हैं ये योगासन, जो देंगे आपको निरोगी काया

Tue, 25 Feb 2025 05:14 PM IST
श्रुति गौड़ लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महाशिवरात्रि के पावन मौके पर हम आपको बताएंगे कि कुछ योगासन ऐसे भी हैं, जिनका सीधा संबंध भोलेनाथ से है। ये योगासन आपके शरीर को निरोग बनाने में काफी ज्यादा मदद करेंगे। 
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भगवान शिव से जुड़े हैं ये योगासन - फोटो : Amar Ujala
Mahashivratri Special Yoga: भगवान शिव को योग का जनक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि योग और ध्यान की परंपरा शिव से ही शुरू की थी। शिव ने ही ध्यान और साधना के माध्यम से आत्मा और परमात्मा के मिलन का मार्ग दिखाया। ऐसे में महाशिवरात्रि के पवित्र अवसर पर हम आपको कुछ योगासनों के बारे में बताने जा रहे हैं जो भगवान शिव से जुड़े हैं।

यदि आप नियमित रूप से ये योगासन करेंगे तो इससे न केवल शरीर मजबूत बनता है बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। इन योगासनों को करना काफी आसान है। इसी के चलते हम आपको इन्हें करने का सही तरीका भी बताएंगे और इनसे होने वाले फायदों के बारे में भी अवगत कराएंगे। 
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नटराजासन - फोटो : Adobe stock
नटराजासन 

सबसे पहले बात करते हैं भगवान शिव के तांडव नृत्य का प्रतीक माने जाने वाले नटराजासन की। ये आसन शरीर के संतुलन को सुधारता है और एकाग्रता बढ़ाता है। नियमित रूप से इसे करने से मांसपेशियां लचीली बनती हैं और शारीरिक स्फूर्ति बढ़ती है।
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नटराजासन - फोटो : Adobe stock
  • इसे करने के लिए आपको सबसे पहले सीधा खड़ा होना है।
  • अब दाहिने पैर को पीछे उठाएं और दाहिने हाथ से टखने को पकड़ें।
  • बाएं हाथ को आगे की ओर सीधा फैलाएं, जैसे किसी लक्ष्य की ओर इशारा कर रहे हों।
  •  शरीर का भार बाएं पैर पर रखें और धीरे-धीरे छाती को आगे झुकाएं।
  • कुछ देर तक ऐसे ही रहें और फिर सामान्य स्थिति में लौटें।
  • इसके बाद दूसरी टांग से इसे दोहराएं।

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भुजंगासन का अभ्यास करती मलाइका अरोड़ा - फोटो : instagram
भुजंगासन

ये आसन शरीर को ऐसे सर्प का आकार देता है, जो भगवान शिव के गले में विराजमान है। यदि आप भुजंगासन नियमित रूप से करेंगे तो इससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होने लगेगी। इसकी वजह से फेफड़े स्वस्थ रहते हैं और सांस लेने की क्षमता भी बढ़ने लगती है।
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bhujangasana - फोटो : Pexel
  • भुजंगासन करने के लिए सबसे पहले जमीन पर पेट के बल लेट जाएं और दोनों पैरों को सीधा रखें।
  • अब हथेलियों को कंधों के पास जमीन पर रखें और कोहनियों को शरीर से सटाकर रखें।
  • गहरी सांस लें और हाथों पर दबाव डालते हुए छाती और सिर को ऊपर उठाएं।
  • इस दौरान अपने पेट को जमीन पर टिकाए रखें और गर्दन को हल्का पीछे झुकाएं।
  • इस मद्रा में आप 30 सेकेंड तक रहें और धीरे-धीरें सांस लेकर वापस आ जाएं। 
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हनुमानासन - फोटो : Adobe stock
हनुमानासन

हनुमान जी भोलेनाथ के ही अवतार हैं। ऐसे में आपको हनुमानासन के बारे में भी अवश्य पता होना चाहिए। इस आसन की वजह से कमर और कूल्हों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। ये आसन कमर दर्द को भी कम करता है।
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हनुमानासन - फोटो : Adobe stock
  • इसे करने के लिए सबसे जमीन पर बैठ जाएं और लंबी सांस लेते हुए दाएं पैर को आगे बढ़ाएं।
  • इसके बाद बाए पैर को धीरे-धीरे पीछे खिसकाएं, जब तक दोनों पैरों के बीच दूरी न आ जाए।
  • अब हाथों को अपने सीने के पास प्रणाम मुद्रा में रखें या उन्हें ऊपर उठाएं।
  • गहरी सांस लें और कुछ सेकंड तक इस मुद्रा में रहें।
  • धीरे-धीरे सांस छोड़ें और वापस सीधे खड़े हो जाएं। 

नोट: यह लेख योग गुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।   
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