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करें योग-रहें निरोग: क्यों दी जाती है खाली पेट प्राणायाम करने की सलाह? यहां जानिए ध्यान मुद्रा के सभी नियम

Sun, 01 Aug 2021 01:20 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ध्यान योग से मन और शरीर दोनों को लाभ (प्रतीकात्मक) - फोटो : social media
चित्त की शांति के लिए मेडिटेशन यानी कि ध्यान मुद्रा को सबसे फायदेमंद योगासन माना जाता है। ध्यान मुद्रा, प्राणायाम का हिस्सा है। प्राणायाम दो संस्कृत शब्दों- प्राण और यम से मिलकर बना है, इसका अर्थ है जीवन की ऊर्जा पर नियंत्रण प्राप्त करना। सांस पर ध्यान केंद्रित करने वाले इस अभ्यास को योगगुरु विशेष फायदेमंद मानते हैं। मानसिक समस्याओं से परेशान लोगों के लिए मेडिटेशन या प्राणायाम अभ्यास को वरदान माना जाता है।
योगगुरुओं के मुताबिक अन्य योग आसनों और व्यायाम की तरह प्राणायाम के भी नियम हैं, अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए इन नियमों का पालन करना सभी के लिए बेहद आवश्यक होता है। प्राणायाम आसनों को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल भी रहते हैं, ऐसा ही एक सवाल है- क्या प्राणायाम को हमेशा खाली पेट ही किया जाना चाहिए? इन आसानों को खाली पेट करने से क्या लाभ हो सकते हैं, आइए इस बारे में आगे की स्लाइडों में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं। 
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प्राणायाम सही तरीके से करें (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
खाली पेट प्राणायाम करने के फायदे
योगगुरु के मुताबिक प्राणायाम मन को स्थिर करने का योगासन है, ऐसे में इसके नियमों का पालन करना भी सभी के लिए बेहद आवश्यक है। प्राणायाम से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए इस ऊर्जा को अपने श्वास या योग आसन पर केंद्रित करना महत्वपूर्ण होता है। जब आप भरे हुए पेट के साथ कोई भी व्यायाम करते हैं, तो आपके लिए कुछ समय के बाद एकाग्र और स्थिर रहना कठिन हो सकता है। भरे पेट के साथ प्राणायाम करने से उत्पन्न होने वाली सारी ऊर्जा, मन को शांत करने और आपके शरीर को ठीक करने के बजाय भोजन को पचाने में खर्च हो जाती है। यही कारण है कि लोगों को खाली पेट ध्यान के अभ्यास करने की सलाह दी जाती है।
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सुबह के समय ध्यान लगाना सबसे फायदेमंद (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
प्राणायाम किस समय करें?
योगगुरु के मुताबिक प्राणायाम से अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए इसका एक समय निश्चित होना चाहिए। प्राणायाम करने के लिए सुबह का समय सबसे आदर्श माना जाता है।  
दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर आप प्राणायाम कर सकते हैं। यदि आप दिन के समय में प्राणायाम करते हैं तो भोजन करने से 3 से 4 घंटे पहले या बाद में यह योगाभ्यास करें। सुबह के समय को सबसे बेहतर माना जाता है क्योंकि उस समय लोगों के लिए ध्यान लगाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
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ध्यान मुद्रा के हैं कई फायदे (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
प्राणायाम के और क्या नियम हैं?
मन को शांत करने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए प्राणायाम फायदेमंद योगाभ्यास माना जाता है। हालांकि इससे अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए सभी लोगों को कुछ नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए।
  • स्वच्छ और शांत जगह पर बैठें।
  • अपने मन को शांत रखें और सही मुद्रा में बैठें।
  • विभिन्न प्रकार के प्राणायाम करके देखें कि कौन सा प्राणायाम आपके लिए सबसे अच्छा है।
  • प्राणायाम केवल सांस लेने और छोड़ने के बारे में नहीं है। इसे करते समय अपनी श्वास को नियंत्रित करने का प्रयास करें।
  • आप 'ओम' मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। इससे ध्यान केंद्रित करने में आसानी होती है।
  • जल्दबाजी में प्राणायाम न करें। शांत रहें और इसे पूरा समय दें। 


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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

 
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