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आज का योग: शलभासन का नियमित अभ्यास इस समस्याओं में है काफी फायदेमंद, क्या आप जानते हैं?

Sun, 06 Mar 2022 12:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शलभासन योग के स्वास्थ्य लाभ - फोटो : iStock
शारीरिक-मानसिक दोनों ही तरह के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए रोजाना योगासनों का अभ्यास करना सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। शरीर में रक्त के संचार को बढ़ावा देने के साथ दर्द, बीमारियों के विकास को रोकने और ऊर्जा के संचार को बढ़ाने में तमाम तरह के योगासनों के अभ्यास के लाभ पाए गए हैं। शलभासन योग एक ऐसा ही योगाभ्यास है जो शरीर के लिए अद्भुत लाभ दे सकता है। पेट-पीठ की समस्याओं को ठीक करने से लेकर मांसपेशियों की मजबूती और कई तरह की अन्य बीमारियों के जोखिम को कम करने में इस योग के अभ्यास को कारगर माना जाता है।

संस्कृत में "शलभ" शब्द का अर्थ होता है टिड्डा, असल में शलभासन करते समय पूरे शरीर का आकार टिड्डे की संरचना जैसा लगता है। शलभासन पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने और पीठ दर्द को दूर करने में आपके लिए लाभदायक हो सकता है। इसका सही ढंग से नियमित अभ्यास करना आपको अद्भुत स्वास्थ्य लाभ दे सकता है। आइए इस बारे में आगे की स्लाइडों में जानते हैं। 
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शलभासन योग करने का तरीका - फोटो : Pixabay
शलभासन योग कैसे करें?
शलभासन योग का अभ्यास आसान है, लेकिन किसी विशेषज्ञ से इसके सही तरीके के बारे में समझ लेना आवश्यक होता है। किसी भी योग से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए उसका सही तरीके से अभ्यास किया जाना आवश्यक है। शलभासन करने लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। दोनों हाथों को सीधा करें और उनको जांघों के नीचे दबा लें। गहरी सांस लेते हुए सिर और दोनों पैरों को ऊपर की ओर उठाने की कोशिश करें। जितना हो सकता हैं उतना अपनी अधिकतम ऊंचाई तक पैरों को ऊपर करें। कुछ देर तक इस स्थिति में रहें और फिर अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।
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शलभासन के हो सकते हैं कई फायदे - फोटो : istock
शलभासन योग के क्या लाभ हैं?
योग विशेषज्ञों के मुताबिक शलभासन योग करने से सेहत को कई तरह से लाभ हो सकता है।
  • पीठ के निचले हिस्से, पैल्विक अंगों, पैरों, कूल्हे के जोड़ों और बाहों को मजबूत करता है।
  • साइटिक नसों को टोन करता है।
  • कमर दर्द, हल्के साइटिका और स्लिप डिस्क में आराम मिलता है।
  • पेट और आंत के रोगों में लाभदायक माना जाता है।
  • रीढ़ और पूरे ऊपरी शरीर में रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है।
  • किडनी, लिवर और शरीर के निचले हिस्से के सभी अंगों को अनुकूल रूप से सक्रिय करता है।
  • पेट के दबाव को बढ़ाने, आंतों के कार्य को नियंत्रित करने और पेट को मजबूत बनाने में सहायक है।
  • भूख को बढ़ाता है।
  • मासिक धर्म के दौरान पीठ दर्द को कम करने में सहायक माना जाता है।

इन बातों का रखें ध्यान
यदि आपकी हाल-फिलाहल कोई सर्जरी हुई हो तो इस आसन का अभ्यास न करें। यदि आपको हार्निया या पेट से संबंधित अन्य कोई समस्या है तो इस योग को करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें। 


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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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