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Human Rights Day 2020: क्यों मनाया जाता है विश्व मानवाधिकार दिवस? जानिए इसका इतिहास और महत्व

Thu, 10 Dec 2020 08:45 AM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विश्व मानवाधिकार दिवस 2020 - फोटो : Pixabay

मानवाधिकार अर्थात विश्व में रहने वाले प्रत्येक मानव को प्राप्त कुछ विशेष अधिकार जो विश्व को एक सूत्र में बांधते हों, हर मानव की रक्षा करते हों, उसे दुनिया में स्वतंत्रता के साथ जीवनयापन करने की छूट देते हों। किसी मनुष्य के साथ किसी भी कीमत पर कोई भेदभाव न हो, समस्या न हो, सब शांति से खुशी- खुशी अपना जीवन जी सकें, इसलिए मानव अधिकारों का निर्माण हुआ। इसमें देश की प्रगति को ध्यान में रखते हुए शिक्षा का अधिकार जैसे कई सामाजिक अधिकारों को सम्मिलित किया गया। अगली स्लाइड्स के माध्यम से जानिए विश्व मानवाधिकर दिवस का इतिहास और अन्य जानकारी। 

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विश्व मानवाधिकार दिवस 2020 - फोटो : Pixabay

इतिहास

10 दिसंबर, 1948 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र जारी कर प्रथम बार मानवों के अधिकार के बारे में बात रखी थी। वर्ष 1950 में संयुक्त राष्ट्र ने हर वर्ष 10 दिसंबर  को 'विश्व मानवाधिकार दिवस' मनाना तय किया। भारत में 28 सितंबर, 1993 से मानव अधिकार कानून अमल में लाया गया था और 12 अक्तूबर, 1993 को 'राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग' का गठन किया गया था, लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 10 दिसंबर 1948 को घोषणा पत्र को मान्यता दिए जाने पर 10 दिसंबर का दिन मानवाधिकार दिवस के लिए निश्चित किया गया। 

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अधिकारों का उल्लंघन करने वालों को अदालत द्वारा सजा दी जाती है - फोटो : pexels.com

क्या होते हैं मानव अधिकार

मानव अधिकार का मतलब मनुष्यों को वो सभी अधिकार देना है, जो व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता एवं प्रतिष्ठा से जुड़े हुए हैं। यह सभी अधिकार भारतीय संविधान के भाग-तीन में मूलभूत अधिकारों के नाम से मौजूद हैं और इन अधिकारों का उल्लंघन करने वालों को अदालत द्वारा सजा दी जाती है।

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विश्व मानवाधिकार दिवस 2020 - फोटो : Pixabay

मानव अधिकारों का महत्व

इस दुनिया में सभी लोग अधिकारों के मामले में बराबर हैं । देश में लोगों के बीच नस्ल, रंग, लिंग, भाषा, धर्म, राजनीतिक या अन्य विचार, राष्ट्रीयता या समाजिक उत्पत्ति, संपत्ति, जन्म आदि बातों के आधार पर कोई भेदभाव नहीं हो सकता है इसलिए मानव अधिकारों का निर्माण किया गया। कोई भी व्यक्ति किसी भा हाल में किसी पर दासता नहीं जता सकता है। हम सभी ईश्वर के संतानें हैं, कोई भी सरकार या संस्था किसी के साथ भेदभाव नहीं कर सकती है।

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विश्व मानवाधिकार दिवस 2020 - फोटो : Pixabay

भारत में काम करने की है आवश्यकता

भारत में मानवाधिकारों की बात की जाए तो यह साफ है कि आज भी कई सारे लोगों को मानवाधिकार के बारे में जानकारी ही नहीं है, जबकि वे उनके खुद के अधिकार हैं। पिछड़े हुए राज्यों एवं गांवों में जहां साक्षरता का स्तर थोड़ा कम है, वहां मानवाधिकारों का हनन होना आम बात है। ऐसे इलाकों में जिन लोगों के पास ताकत है, वे इनका पालन नहीं करते और सामान्य लोगों पर दबाव बनाते हैं। शहरों में जिन लोगों को मानवाधिकारों की जानकारी तो है लेकिन वे इनसे गलत फायदा भी उठा लेते हैं।

 

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