पक्षियों की शहरों में आवश्याकताओं की पूर्ति नहीं हो पाती है
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प्रवासी पक्षियों पर शहरीकरण का प्रभाव
जिन-जिन जगहों पर विकास के नाम पर शहरीकरण बढ़ता गया, उन जगहों से पक्षी दूर होते गए। अध्ययनों में यह साबित हुआ है कि यह एक-दूजे के पूरक होने जैसै ही है। शहरों में बन रही बड़ी-बड़ी इमारतों के कारण प्रवासी पक्षियों ने भी शहरों की ओर जाना छोड़ दिया है। यूरैशियन ब्लैकबर्ड और गौरैया का प्रवास पिछले सालों में कम हो चुका है। कीटों का सेवन करके जीवनयापन करने वाले पक्षियों की शहरों में आवश्याकताओं की पूर्ति नहीं हो पाती है, इस वजह से भी वे शहरों की ओर नहीं जाते हैं। एक शोध में तो यह भी पाया गया है कि जो पक्षी पहले से शहर में रह रहे होते हैं, उनके व्यवहार में इतनी सख्ती और प्रतिस्पर्धा की भावनाएं आ जाती हैं कि वे प्रवासी पक्षियों को ठहरने ही नहीं देते हैं।