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Tirupati Tirumala Tour: प्रभु दर्शन और खूबसूरत नजारों की सौगात

Sun, 08 Jan 2023 04:36 PM IST
स्वाति शैवाल लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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तिरुपति बालाजी
भारत तीर्थों का देश है। यहाँ हर क्षेत्र में आपको विभिन्न धर्मों के तीर्थ और उनसे जुड़ी कई अद्भुत कथाएं सुनने को मिलेंगी। धार्मिक और ऐतिहासिक तौर पर तो इन स्थानों का महत्व है ही, इसके साथ ही इनके आस पास मौजूद प्राकृतिक परिवेश मन को शांति देने का काम भी करता है। चाहे वह फिर केदारनाथ हो, बद्रीनाथ, रामेश्वरम, महेश्वर, वैष्णोदेवी या कोई भी अन्य तीर्थ। सात पहाड़ियों के ऊपर बसा विष्णु स्वरूप भगवान वेंकटेश का भव्य और अद्भुत मंदिर तिरुपति बालाजी भी ऐसा ही एक तीर्थस्थल है। यहां प्रभु दर्शन के साथ ही आपको प्रकृति के मनमोहक नजारे भी दिखेंगे और दक्षिण भारतीय स्वाद का आनंद भी मिलेगा। 
अगर आपको दर्शनों का समय रात 1-सुबह 5 के बीच का मिला है तो भी यह महसूस होगा ही नहीं कि आप आधी रात से लाइन में लगकर चल रहे हैं। दर्शन करके जब बाहर निकलेंगे तो आसमान में बिखरे रंग आपको एक अलग ही तरह ही संतुष्टि, शांति और सकारात्मकता से भर देंगे। ठंडी और ताज़ी हवा आपको ख़ुशी से भर देगी। 
 
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अद्भुत है तिरुपति बालाजी मंदिर - फोटो : istock
जहाँ भगवान बहुत कम विश्राम करते हैं 

पहाड़ों के ऊपर बिराजे भगवान वेंकटेश के दर्शन करने लोग देश-विदेश से बड़ी संख्या में आते हैं। ऐसी मान्यता है कि ये दुनिया के सबसे अमीर भगवान हैं। इसका प्रमाण आपको तब मिलता है जब दर्शन के लिए लाइन में लगे हुए लोग आपके सामने वेंकटेश्वरा वेंकटेश्वरा, गोविंदा गोविंदा,  कहते हुए अपने पहने हुए गहने और जेब से पूरा का पूरा बटुआ निकाल कर दान पात्र में निसंकोच डाल देते हैं। भगवान सुबह से लेकर लगभग पूरी रात भक्तों को दर्शन देते हैं और इसलिए यह मान्यता भी है कि यहाँ भगवान महज एक घंटे का ही विश्राम करते हैं क्योंकि उन्हें दर्शन के लिए आतुर हर भक्त को दर्शन देने होते हैं। 
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मनमोहक मंदिर प्रांगण - फोटो : istock
मनमोहक नजारों और प्राकृतिक उपहारों से सजा

मंदिर प्रांगण से जो खुले आसमान का नजारा आपको दिखाई देता है वह तो अद्भुत है ही, खासकर रात के दर्शनों के दौरान। इसके अलावा मंदिर की ओर पहाड़ी रास्ते से जाते समय, शहर में घूमते हुए भी आपको प्रकृति का संगीत सुनाई देगा। अगर आपको दर्शनों का समय रात 1-सुबह 5 के बीच का मिला है तो भी यह महसूस होगा ही नहीं कि आप आधी रात से लाइन में लगकर चल रहे हैं। दर्शन करके जब बाहर निकलेंगे तो आसमान में बिखरे रंग आपको एक अलग ही तरह ही संतुष्टि, शांति और सकारात्मकता से भर देंगे। ठंडी और ताज़ी हवा आपको ख़ुशी से भर देगी। 

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आलौकिक अनुभूति दर्शनों की
बादलों की टोलियां 

सात पहाड़ियों की ऊंचाई पर होने के कारण कई बार आपको बादल भी यहाँ घूमते-फिरते मिल जायेंगे। दर्शनों के लिए मंदिर की ओर जाते समय रास्ते में छोटे छोटे बादलों की टुकड़ियां आपसे मुलाक़ात करने आ सकती हैं। खासकर रात में तो यह नजारा और भी अद्भुत बन जाता है। ऐसा लगता है जैसे परियों की कहानियों या धार्मिक कहानियों में पढ़े चित्र साकार हो गए हों। रुई के फाहों से आस पास उड़ते बादल आपको रोमांच की सिहरन से भर जाते हैं। ऊपर से देखने पर रौशनी से जगमगाते पहाड़ और मंदिर का प्रांगण भी बेमिसाल दृश्य प्रस्तुत करता है। ऐसा लगता है मानो किसी ने पूरी तस्वीर में हीरे बिखेर दिए हों। 
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दर्शनों के लिए पहले से करें तैयारी - फोटो : istock
सात पहाड़ों के ऊपर 

आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में मौजूद तिरुपति तक पहुंचने के लिए कई रास्ते हैं। तिरुपति शहर नीचे बसा है जबकि तिरुमला सात पहाड़ों के ऊपर मौजूद है जहाँ मंदिर स्थित है। बैंगलोर सहित आस पास के कई स्थानों से लोग वीएंड में भी तिरुपति के लिए निकल आते हैं। सामान्य समय में लाइन में लगकर दर्शन भी दिनभर में हो जाते हैं लेकिन अच्छा यह होगा कि आप पहले से इसके लिए पूरी प्लानिंग और इंतज़ाम करके यहाँ आएं। यदि आपने अचानक कार्यक्रम बनाया है तो आप तिरुपति में रुकने का विकल्प चुन सकते हैं क्योंकि तिरुमला में मौजूद रुकने के स्थान अक्सर भरे होते हैं और इनके लिए बहुत पहले से इंतज़ाम करना होता है। 
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पहले से करवाएं बुकिंग - फोटो : istock
पूर्व में करवाए जाने वाली बुकिंग्स 

* होटल या धर्मशाला की बुकिंग। जिसमें खासकर पहाड़ी के ऊपर मौजूद धर्मशाला की बुकिंग सबसे मुख्य काम है 
* दर्शनों के लिए बुकिंग। इसके लिए बकायदा कुछ श्रेणियों में टिकिट होते हैं और उनके लिए अलग अलग शुल्क भी होते हैं। अच्छी बात यह है कि टिकट्स ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं और इनके साथ आप दर्शन या सेवा का समय भी अपने हिसाब से चुन सकते हैं 
* टीटीडी की वेबसाइट पर आपको कई प्रकार के विकल्प ठहरने के लिए मिल सकते हैं और सभी पर एडवांस बुकिंग की सुविधा होती है 
* चाहे आप ट्रेन से आएं, बस से या एरोप्लेन से, वे सभी आपको तिरुपति तक पहुंचाएंगी। इसके बाद पहाड़ तक जाने के लिए टैक्सी या अन्य सेवाएं लेनी होंगी, इसके लिए भी आप पहले से बुकिंग करवा सकते हैं
 
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भव्य है मंदिर का प्रांगण
खान-पान और दर्शन 

दर्शन करने के लिए कई यात्री पहाड़ तक का सफर पैदल चलकर भी पूरा करते हैं। इन यात्रियों के लिए फ्री दर्शन की सुविधा भी उपलब्ध होती है। पूरे शहर और मंदिर में दर्शन से लेकर खान-पान और प्रसाद तक के लिए इतना अच्छा प्रबंधन है कि परेशान होने की कोई जरूरत ही नहीं होती और शांति से हर काम होता जाता है। प्रसाद के लिए सीमा भी है और शुल्क भी, ताकि न तो प्रसाद व्यर्थ जाए, न ही इसकी बेकद्री हो। शहर में भ्रमण के लिए फ्री बसों की सुविधा भी होती है या आप पैदल भी चल सकते हैं। ज्यादातर दक्षिण भारतीय व्यंजन ही मिलेंगे लेकिन शहर में आजकल बाकी तरह के नाश्तों की दुकानें भी मिल जाती हैं। 
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तिरुपति स्टेशन का दृश्य
यह बातें भी हैं ख़ास 

* पहाड़ की ओर जाते समय आपको रास्ते में कुछ शुल्क चुकाना पड़ते हैं, इसका ध्यान रखें 
* पैदल चलने वाले रास्ते एकदम साफ़ और छायादार रखे गए हैं ताकि चढ़ने में दिक्कत न हो।  यहाँ पानी और नाश्ता भी खरीदने की व्यवस्था रहती है। मंदिर के भीतर भी कई घंटे लाइन में लगे रहना पड़ सकता है और वहां भी मंदिर मैनेजमेंट के लोग पानी व कुछ प्रसाद प्रदान करते रहते हैं। साथ ही जगह जगह पर बाथरूम की सुविधा भी होती है 
* मंदिर परिसर या पहाड़ पर किसी भी तरह का मांसाहार, शराब या नशीले पदार्थ, ज्वलनशील पदार्थ आदि ले जाना वर्जित है, इसका ध्यान रखें 
* दर्शन के लिए जाते समय आपके वस्त्र मंदिर के अनुरूप होने जरूरी हैं। ट्रेडिशनल ड्रेस इसके लिए सबसे अच्छा विकल्प है,महिला-पुरुषों दोनों के लिए 
 
 
 
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