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बिहार के राजगीर महोत्सव की शुरुआत आज से, तीन दिन लें राग-रंग और खान-पान के जायके का मजा

Mon, 25 Nov 2019 03:57 PM IST
Nilesh Kumar लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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Rajgir - फोटो : Amar Ujala
पर्यटन की दृष्टि से बिहार का एक खूबसूरत शहर है- राजगीर। रमणीय स्थलों के शहर राजगीर घूमने के लिए आप कभी भी जा सकते हैं, लेकिन गर्मी की अपेक्षा सर्दियां यहां घूमने के लिए ज्यादा मुफीद है। नवंबर से फरवरी तक यहां का मौसम शानदार होता है और पर्यटन के लिहाज से यही बेहतरीन समय है। फिलहाल यहां हर वर्ष होने वाले राजगीर महोत्सव का आगाज हो चुका है, जहां आपके लिए काफी कुछ खास है। आइए, जानते हैं:  
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pankaj udhas
गुलाबी सर्दी के बीच पांच पहाड़ियों से घिरे राजगीर की खूबसूरती इन दिनों और निखर गई है। 25 से 27 नवंबर तक हो रहे राजगीर महोत्सव में देश-विदेश के कई कलाकार शिरकत कर रहे हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में इस बार मशहूर गजल गायक पद्मश्री पंकज उदास की मखमली आवाज का आनंद भी पर्यटक उठा सकेंगे।
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Rajgir - फोटो : Social Media
राजगीर महोत्सव में ग्रामश्री मेले का भी आयोजन हो रहा है। इस बार यहां 13 राज्यों के स्टॉल लगाए जा रहे हैं, जिसमें बिहार के अलावा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड की प्रसिद्ध चीजों की खरीदारी कर सकेंगे। पर्यटक यहां दंगल प्रतियोगिता, तांगा दौड़, सद्भावना मार्च, महिला महोत्सव और नुक्कड़ नाटकों का भी आनंद ले सकेंगे। बच्चों के लिए फन जोन और खान-पान के कई स्टॉल की भी व्यवस्था है।

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Rajgir - फोटो : Social Media
नालंदा जिले में स्थित राजगीर कभी मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। पौराणिक साहित्य के अनुसार राजगीर, एक ओर बह्मा की पवित्र यज्ञ भूमि और संस्कृति और वैभव का केंद्र रहा है, तो दूसरी ओर  जैन तीर्थंकर महावीर और भगवान बुद्ध की साधनाभूमि भी रहा है। गर्म कुंडों की बात करें तो इस शहर में पुरुष और महिलाओं के नहाने के लिए 22 कुंड हैं।
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Rajgir - फोटो : Social Media
राजगीर प्राचीन बौद्ध पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यहां के गृद्धकूट पर्वत पर महात्मा बुद्ध ने उपदेश दिए थे। जापान के बुद्ध संघ ने इस पर्वत पर शांति स्तूप बनवाया है। यहां पहुंचने के लिए 'रोप वे' का भी आनंद लिया जा सकता है, वहीं पैदल चढ़ाई का भी अलग ही एडवेंचर है। यहां बांसों का वन ‘वेणुवन बिहार’ भी है, जबकि 'स्वर्ण भंडार' भी घूमा जा सकता है, जहां कभी सम्राट जरासंध का सोने का खजाना हुआ करता था।
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