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यहां है मृत्यु के बाद भी ड्यूटी करने वाले भारतीय सैनिक का मंदिर, जहां चीनी सेना भी झुकाती है सिर

Sat, 29 Feb 2020 11:12 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Baba Harbhajan Singh Mandir
अपने देश में देवी-देवताओं के तो मंदिर बहुत हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपने देश में एक भारतीय सैनिक का मंदिर भी है, जहां दूर-दूर से लोग शीश नवाने पहुंचते हैं। कहा जाता है कि इस भारतीय सैनिक ने मृत्यु के बाद भी सेना की नौकरी नहीं छोड़ी।सुनने में थोड़ा अजीब सा जरूर लग रहा होगा, लेकिन ये हकीकत है। सिक्किम की राजधानी गंगटोक में जेलेप दर्रे और नाथुला दर्रे के बीच 14 हजार फीट की ऊंचाई पर बने इस मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन करने पहुंचते हैं। केवल भारतीय सेना ही नहीं, चीनी सेना भी उनके सम्मान में शीश नवाती है। हम बता रहे हैं सिपाही से बाबा बनें हरभजन सिंह की कहानी, जिसे पढ़कर आपका मन भी एक बार वहां जाने का जरूर करेगा: 
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Baba Harbhajan SIngh Mandir - फोटो : Amar Ujala
30 अगस्त 1946 को पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान) के सदराना गांव में जन्में हरभजन 1966 को भारतीय सेना के पंजाब रेजिमेंट में सिपाही के रूप में भर्ती हुए। इसके बाद 1968 में 23वें पंजाब रेजिमेंट के साथ पूर्वी सिक्किम में तैनात थे।  चार अक्टूबर 1968 को खच्चरों का काफिला ले जाते समय नाथुला पास  के समीप उनका पैर फिसल गया और घाटी में गिरने से उनकी मौत हो गई। पानी का तेज बहाव उनके शरीर को बहाकर दूर ले गया। 
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Baba Harbhajan Singh Mandir
कहा जाता है बाबा हरभजन सिंह ने साथी सैनिक के सपने में आकर अपने शरीर के बारे में बताया और खोजबीन के तीन दिन बाद उनका शरीर भारतीय सेना को उसी जगह मिला। यह भी माना जाता है कि उन्होंने सपने में एक समाधि बनवाने की इच्छा जाहिर की थी, जिसके बाद जेलेप दर्रे और नाथुला दर्रे के बीच 14 हजार फीट की ऊंचाई पर उनकी समाधि बना दी गई।

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Baba Harbhajan Singh Mandir
कहा जाता है कि मृत्यु के बाद भी बाबा हरभजन सिंह अपनी ड्यूटी करते हैं और चीन की सभी गतिविधियों की जानकारी अपने साथियों को सपने में आकर देते हैं। उनके प्रति सेना का भी इतना विश्वास है कि उन्हें बाकी सभी की तरह वेतन, दो महीने की छुट्टी आदि सुविधा भी दी जाती थी। हालांकि वे अब रिटायर हो चुके हैं।
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Baba Harbhajan Singh Mandir
दो महीने की छट्टी के दौरान ट्रेन में उनके घर तक की टिकट बुक करवाई जाती है और स्थानीय लोग उनका सामान लेकर उन्हें रेलवे स्टेशन छोड़ने जाते हैं। उनके वेतन का एक चौथाई हिस्सा उनकी मां को भेजा जाता है। यही नहीं, नाथुला में जब भी भारत और चीन के बीच फ्लैग मीटिंग होती है तो चीनी सेना बाबा हरभजन के लिए एक अलग से कुर्सी भी लगाती है। 
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Baba Harbhajan Singh Mandir
बाबा हरभजन सिंह के मंदिर में उनकी तस्वीर के साथ उनके जूते और बाकी सामान रखे गए हैं। भारतीय सेना के जवान इस मंदिर की चौकीदारी करते हैं और रोज उनके जूतों को पॉलिश भी करते हैं। वहां पर तैनात सिपाहियों ने कई बार ऐसा कहा है कि उनके जूतों पर किचड़ लगा हुआ होता है और उनके बिस्तर पर सलवटें पर दिखाई पड़ती है।
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Baba Harbhajan Singh Mandir - फोटो : Baba Harbhajan Singh Mandir
भारतीय सेना और लोगों का ऐसा मानना है कि आज भी बाबा हरभजन सिंह की यहां सूक्ष्म उपस्थिति है और वे देश की सरहद की रक्षा करते हैं। न केवल भारतीय सेना बल्कि उनके बारे में जानने वाला हर भारतीय उन पर गर्व करता है। आप भी अगर सिक्किम का टूर प्लान करें तो बाबा हरभजन सिंह के मंदिर जा सकते हैं। 
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