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भारत में मौजूद इन किताबघरों की बात है सबसे अलग, संग्रह देख रह जाएंगे अचंभित

Wed, 13 Jan 2021 05:49 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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देशभर में न जाने कितने ही पुस्तकालय हैं - फोटो : पेक्सेल्स

किताबों की दुनिया अलग ही होती है और जो इस दुनिया में रहता है वह वाकई बहुत खुशनसीब होता है क्योंकि किताबें कभी भी किसी से कुछ छीनती नहीं है बल्कि बदले में बहुत कुछ देती है। किताब पढ़ने वाला व्यक्ति पीछे पलटकर नहीं देखता है, बल्कि तरक्की ही करता है। वैसे तो देशभर में न जाने कितने ही पुस्तकालय हैं लेकिन कुछ किताबघर ऐसे भी हैं, जिनकी विशिष्टताएं उन्हें सबसे अलग बनाती है। अगली स्लाइड्स से जानिए भारत के प्राचीन एवं ऐतिहासिक पुस्तकालयों के बारे में।   

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

शेरोफजी सरस्वती महल
तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित यह पुस्तकालय एशिया के प्राचीनतम पुस्तकालयों में से एक है। यह पुस्तकालय तंजावुर पैलेस कैम्पस में स्थित है। यहां ताड़ के पत्तों पर पांडुलिपियों का दुर्लभ संग्रह मौजूद है। यहां इन संरक्षित पुस्तकों को पढ़ा भी जा सकता है। इसका नाम शाही मराठा संरक्षक शेरोफजी के सम्मान में रखा गया है। यह अपने आप में एक अनूठा पुस्तकालय है।


 

 

 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Facebook

शेषाद्रि अय्यर मेमोरियल हॉल
बैंगलुरु स्थित यह पुस्तकालय अपनी ख़ूबसूरती और पुस्तकों के अथाह संग्रह के लिए जाना जाता है। 1883 से 1901 तक मैसूर के दीवान रहे सर के. शेषाद्रि की स्मृति में बनाया गया। पुस्तकालय की स्थापना 1915 में हुई। यहां क़रीब 3 लाख किताब हैं और ब्रेल लिपि का भी एक अलग विभाग बनाया गया है जिस वजह से नेत्रहीन लोग भी ज्ञानार्जन में बिल्कुल पीछे नहीं रहते हैं। 

 

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इसकी स्थापना 1896 में हुई - फोटो : Demo Pic.

कॉनेमरा सार्वजनिक पुस्तकालय
चेन्नई स्थित यह पुस्तकालय देश के उन चार राष्ट्रीय डिपॉज़िटरी पुस्तकालयों में से एक है जहां सभी पुस्तकों, अख़बारों और पत्र-पत्रिकाओं की एक प्रति भेजी जाती है। इसकी स्थापना 1896 में हुई और यहां सदियों पुरानी प्रकाशनों का दुर्लभ भंडार है। यह पुस्तकालय संयुक्त राष्ट्र संघ के लिए भी डिपॉज़िटरी पुस्तकालय का कार्य करता है। कोई किताब ऐसी नहीं जो यहां न पाई जाती हो।

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दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे व्यस्त सार्वजनिक पुस्तकालय है - फोटो : social media

दिल्ली सार्वजनिक पुस्तकालय
1951 में यूनेस्को परियोजना के रूप में इसका शुभारम्भ किया गया था। यह दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे व्यस्त सार्वजनिक पुस्तकालय है। इस पुस्तकालय की अनेक शाखा, उपशाखाएं पूरी दिल्ली में फैली हैं और क़रीब 18 लाख पुस्तकों का संग्रह यहां मौजूद है। पुस्तकालय में 9,431 ग्रामोफोन, रिकार्ड्स और कैसेट का स्टाॅक मौजूद है। किताबी कीड़े भारी मात्रा में इस पुस्तकालय में आते हैं क्योंकि यहां आकर उनकी सारी आवश्यकताएं पूरी हो जाती है।

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