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हर मन्नत पूरी करती हैं कामाख्या देवी, ऐसे बनाइए दर्शन का प्लान

Fri, 15 Mar 2019 03:13 PM IST
प्रशांत राय लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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कामख्या मंदिर
कामाख्या मंदिर भारत का एक दुर्लभ शक्तिपीठ है। यह शक्ति उपासना की एक बहुत शक्तिशाली जगह है। अतीत में, कई पुरुषों और महिलाओं ने जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्ति की मांग करते हुए इस प्राचीन मंदिर में दिव्य मां की कृपा मांगी है। यह मंदिर असम के कामरूप जिले के गुवाहाटी शहर में नीलांचल पहाड़ी यानी की कामागिरी पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना हुआ है और इसका तांत्रिक महत्व भी है।
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कामख्या मंदिर
यह तीर्थ स्थान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं पर भगवान शिव की पत्नी देवी सती का गुप्तांग गिरा था, जब भगवान विष्णु के ह्रदय को शांत करने के लिए उनके शव को पचास से अधिक टुकड़ों में काट दिया गया था। बाद में, भगवान शिव ने इस स्थान पर एक शक्ति मंदिर का निर्माण किया। भगवान भैरव का मंदिर भी है, जो कामाख्या मंदिर के समीप शिव का रूप है।
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कामख्या मंदिर
हर साल कामाख्या मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती रहती है। इसका मतलब है कि कामाख्या मंदिर तक पहुंचना एक परेशानी से मुक्त प्रयास है। दुनियाभर के तांत्रिकों का ये पूज्य स्थान है। यह मंदिर हर साल तीन दिन के लिए बंद होता है। देवी के 51 शक्तिपीठ में ये शामिल है। 

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कामख्या मंदिर
मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा जमीन से लगभग 20 फीट नीचे एक गुफा में स्थित है। यहां बलि चढ़ाने की भी प्रथा है। इसके लिए मछली, बकरी, कबूतर और लौकी, कद्दू जैसे फल वाली सब्जियों की भी बलि दी जाती है। 
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कामख्या मंदिर
कैसे पहुंचे?
लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, जिसे गुवाहाटी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में भी जाना जाता है, कामाख्या मंदिर का निकटतम हवाई अड्डा है। हवाई अड्डे से मंदिर लगभग 20 किमी दूर स्थित है। लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा नई दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और अन्य भारतीय शहरों से नियमित उड़ानें जोड़ता है।
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