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गणेश चतुर्थी 2021: ये हैं भारत के 10 बड़े गणपति मंदिर, आम आदमी से लेकर बॉलीवुड स्टार तक जाते हैं मत्था टेकने

Fri, 10 Sep 2021 12:03 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गणपति मंदिर - फोटो : Pixabay
10 सितंबर से गणेश चतुर्थी का त्योहार शुरू हो रहा है। यह हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों के अनुसार, इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। वैसे तो यह त्योहार पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र में लोग बड़ी धूमधाम से इसे मनाते हैं। इस अवसर पर कई प्रमुख जगहों पर भगवान गणेश की बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। कई लोग तो अपने-अपने घरों में भी गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करते हैं और उनकी पूजा करते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग भगवान गणेश के देशभर में स्थित मंदिरों में भी पूजा-अर्चना के लिए जाते हैं। भगवान गणेश के मंदिर के रूप में सिद्धिविनायक मंदिर बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है। इसके अलावा भी उनके बहुत से प्राचीन मंदिर हैं, जहां भक्त अपने कष्टों के निवारण के लिए प्रार्थना करने जाते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में... 
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श्री सिद्धिविनायक मंदिर - फोटो : iStock
श्री सिद्धिविनायक मंदिर 
  • भगवान गणेश के देशभर में जितने भी मंदिर हैं, उनमें यह सबसे प्रसिद्ध है। मुंबई में स्थित इस मंदिर की गिनती भारत के सबसे अमीर मंदिरों में की जाती है। बड़े-बड़े बॉलीवुड स्टार भी इस मंदिर में अपनी मनोकामनाएं लेकर मत्था टेकने आते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई मंदिर
  • भगवान गणेश का यह मंदिर महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। पुणे स्थित इस मंदिर का निर्माण दगडूशेठ हलवाई द्वारा करवाया गया था, इसी वजह से इसका नाम श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई मंदिर पड़ा। कहते हैं कि भगवान गणेश यहां आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी करते हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कनिपकम विनायक मंदिर, चित्तूर
  • यह मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में कनिपकम गांव में स्थित है। कहते हैं कि इस मंदिर की स्थापना 11वीं सदी की शुरुआत में चोल राजा कुलोथुंगा चोल I द्वारा की गई थी, जबकि 1336 ईस्वी में विजयनगर साम्राज्य में इसका विस्तार किया गया। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
मनकुला विनायक मंदिर, पुडुचेरी
  • गणेश जी के इस मंदिर को भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। इसका इतिहास वर्ष 1666 से भी पहले का है। कहते हैं कि पहले यहां गणेश जी की मूर्ति के आसपास ढेर सारा बालू था, इसीलिए लोग इन्हें मनकुला विनायगर पुकारने लगे। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
मधुर महागणपति मंदिर 
  • केरल में मधुरवाहिनी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर गणेश जी के प्राचीन मंदिरों में से एक है। इसका इतिहास 10वीं सदी का माना जाता है। यहां गणेश जी की प्रतिमा चमत्कारी रूप से दीवार पर उभरी है, जिसके दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
रणथंभौर गणेश मंदिर
  • यह मंदिर राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित है, जो विश्व धरोहर की सूची में शामिल रणथंभौर किले के भीतर बना हुआ है। यहां स्थित भगवान गणेश को त्रिनेत्र गणेश भी कहा जाता है। यह मंदिर प्रकृति व आस्था का अनूठा संगम है। कहते हैं कि इस मंदिर का निर्माण महाराजा हम्मीरदेव चौहान ने करवाया था, लेकिन मंदिर के अंदर भगवान गणेश की प्रतिमा स्वयंभू है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
मोती डूंगरी गणेश मंदिर 
  • राजस्थान के जयपुर में स्थित यह मंदिर देश के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। वैसे तो इस मंदिर की स्थित गणेश जी की प्रतिमा को वर्ष 1761 में जयपुर के राजा माधोसिंह की रानी के पैतृक गांव मावली (गुजरात) से लाया गया था, लेकिन इस प्रतिमा का इतिहास 500 साल से अधिक पुराना माना जाता है।  

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
गणेश टोक मंदिर 
  • यह मंदिर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य सिक्किम की राजधानी गंगटोक से करीब सात किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर स्थित है। वैसे तो यह मंदिर आकार में बहुत छोटा है, लेकिन इसकी छत विशाल है, जहां से गंगटोक शहर का खूबसूरत नजारा देखा जा सकता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
गणपतिपुले मंदिर, रत्नागिरी
  • यह गणेश मंदिर महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में स्थित सह्याद्री पर्वत शृंखला में समुद्र किनारे स्थित है। इसे स्वयंभू मंदिर के नाम से पहचाना जाता है, जिसका इतिहास तीन हजार साल से भी अधिक पुराना माना जाता है। यहां की सबसे खास बात ये है कि समुद्र की लहरें मंदिर तक पहुंच जाती हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
उच्ची पिल्लयार मंदिर
  • तमिलनाडू के तिरुचिरापल्ली के रॉक फोर्ट पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर गणेश जी के प्राचीन मंदिरों में से एक है। लगभग 273 फुट की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को लगभग 400 सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है। 
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