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भगवान राम और भरत के मिलन का साक्षी चित्रकूट, जहां के मंदिरों की है अलौकिक मान्यता

Sat, 09 Nov 2019 01:01 PM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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अयोध्या से 6 घंटे की दूरी पर बना है चित्रकूट।भगवान राम और हनुमान की नगरी के रूप में जाना जाने वाला ये शहर अपने माता पिता के साथ सैर के लिए एक बढिया जगह है। इस जगह की सैर करने पर न केवल आपके माता-पिता को सुकून मिलेगा बल्कि आप को भी कुछ नया देखने को मिलेगा। तो इस बार ट्रिप पर जाने की सोच रहें हैं तो चित्रकूट एक बढिया जगह हो सकती है। यहां पर बने मंदिरों की मान्यताओं को सुनकर जरूर ही आपको हैरानी होगी। तो चलिए जानें चित्रकूट नगरी में क्या है घूमने के लिए.....


 
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चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
चित्रकूट शहर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच बसा एक छोटा सा शहर है जिसका भू भाग दोनों प्रदेशों में फैला हुआ है। इस छोटे से शहर में बहुत से मंदिर हैं जिनके दर्शन के लिए सैलानी आते हैं। मान्यता है कि यहां पर चौदह वर्ष के वनवास के बाद राम और उनके भाई भरत का मिलाप हुआ था। इसके साथ ही यहां पर हनुमान जी का एक मंदिर  है जिसके बारे में भी कुछ मान्यताए प्रचलित है। इस धार्मिक नगरी में बहुत से तीर्थ स्थान है। तो चलिए जानें कौन सी है वो जगहें।

 
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जानकी कुंड और स्फटिक शिला
रामघाट से दो किमी की दूरी पर बना है जानकी कुंड। कहते हैं कि माता सीता इस कुंड में स्नान करती थी। इसके साथ ही यहां पर एक शिला रखी हुई है जिस पर मां सीता के पैरों के निशान बने हुए हैं। जिसके बारे में कहा जाता है कि इस शिला पर खड़ी सीता मां के पैर में जयंत ने कौवे का रूप धरकर चोंच मारी थी। 

 

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सती अनुसूइया की रसोई
चित्रकूट में ही रामघाट से लगभग चार किमी की दूरी पर एक आश्रम बना हुआ है। जो कि सती अनुसूइया और महर्षि अत्रि का था। यहां पर अनुसूइया ने माता सीता को दिव्य वस्त्र दिए थे जो कभी भी मैले नहीं होते थे। 

 
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गुप्त गोदावरी
चित्रकूट से 18 किमी दूर एक जगह बनी है जिसको गुप्त गोदावरी कहा जाता है। गुप्त गोदावरी जगह का नाम पड़ने के बारे में कहा जाता है कि गोदावरी नदी लुप्त हो जाती हैं। यहां पर दो गुफाएं बनी हैं, जिनमें से एक गुफा चौड़ी और दूसरी का प्रवेश द्वार संकरा है। गुफा के अंत में छोटा तालाब बना हुआ है। जिसे गोदावरी नदी कहते हैं।

 
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हनुमान धारा
ऊंचे पहाड़ पर हनुमान धारा बनी हुई है। यहां पर हनुमान जी की बहुत बड़ी प्रतिमा स्थापित है। मूर्ति के सामने ही तालाब में झरने से पानी गिरता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस धारा को श्रीराम ने हनुमान के लिए तब बनवाई थी जब वो लंका दहन के बाद विश्राम करने यहां आए थे। कहते हैं कि इस स्थान पर आज भी हनुमान जी का वास है।
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कामदगिरी या कामतानाथ
चित्रकूट में कामदगिरी नाम का एक पर्वत है जिसका धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है। माना जाता है कि इस पर्वत के दर्शन और परिक्रमा करने से सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। इस पर्वत के दक्षिण किनारे पर लक्ष्मण जी का मंदिर बना हुआ है। कहते हैं कि राम के वनवास के समय लक्ष्मण जी यहीं रहा करते थे।

 
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रामघाट
मंदाकिनी नदी के तट पर बने इस घाट के बारे में कहा जाता है कि भगवान राम यहां पर रोज स्नान करने आया करते थे। अगर चित्रकूट घूमने के लिए गए हैं तो रामघाट के तट पर होने वाली आरती का हिस्सा जरूर बनें।
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