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कहानी उन लोगों की जो नहीं रखते सेक्स करने की इच्छा

Sat, 15 Feb 2020 11:41 AM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इंसानियत के इतिहास में अगर किसी चीज में सबसे ज्यादा दिलचस्पी देखी गई है, तो वो है सेक्स। फिर वो चाहे पढ़ने लिखने में, बुत या पेंटिंग बनाने में हो, या फिर दूसरी तरह की चर्चा। दूसरे मुद्दों के मुकाबले सेक्स पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई है। ऐसे में हम अगर आपको ये बताएं कि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें सेक्स में कतई दिलचस्पी नहीं होती, तो आप यकीन नहीं करेंगे।मगर दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन्हें कामेच्छा या यौनेच्छा महसूस नहीं होती। वो विपरीत लिंग के प्रति कोई खिंचाव महसूस नहीं करते। सेक्स के बगैर भी उन्हें अपनी जिंदगी में कोई कमी नहीं महसूस होती।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जबकि सदियों से समाज में, लोगों के बीच यही मान्यता रही है कि सेक्स के बगैर जिंदगी अधूरी है। ऐतिहासिक ग्रंथों में सेक्स को बहुत अहम बताया गया है। ग्रीक पुराणों में तो यहां तक कहा गया है कि अगर आपकी सेक्स लाइफ सही है तो ही आपकी जिंदगी सही चल रही है। अगर ऐसा नहीं है तो आपकी जिंदगी बेकार है। आपको इंसान नहीं माना जा सकता।

मगर, हाल के दिनों में ऐसे लोग खुलकर सामने आ रहे हैं, जो ये कहते हैं कि उन्हें यौनेच्छा महसूस नहीं होती। उन्हें सेक्स की जरूरत नहीं लगती।ऐसे लोगों को अब भी समाज में स्वीकार करने में हिचक है। लेकिन बहुत से वैज्ञानिक हैं जो ऐसे लोगों के बारे में जानने में दिलचस्पी ले रहे हैं। जिन्हें सेक्स की जरूरत महसूस नहीं होती, उसमें दिलचस्पी नहीं है, वो खुद को 'एसेक्सुअल' कहते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एक मोटे अंदाजे के मुताबिक दुनिया में कम से कम एक फीसद लोग ऐसे हैं जिन्हें कामेच्छा महसूस नहीं होती, जिन्हें सेक्स में दिलचस्पी नहीं है। ये भी कहा जाता है कि ऐसे लोगों में सत्तर फीसद महिलाएं हैं। लंदन के रहने वाले माइकल डोर ऐसे ही शख्स हैं जो सेक्स की चाहत महसूस नहीं करते। उन्हें लड़कियों में, महिलाओं में कोई दिलचस्पी नहीं। जब वो बड़े हो रहे थे तो उनके तमाम दोस्त, लड़कियों के बारे में बातें करते थे, उनसे संबंध बनाने की जुगत भिड़ाते रहते थे।

लेकिन माइकल डोर को इसमें कोई दिलचस्पी ही नहीं थी। शुरू में तो ये कहा गया कि शायद उनमें सेक्स हॉरमोन की कमी है। आगे चलकर जब ये हॉरमोन बनने लगेंगे तो उन्हें भी सेक्स की जरूरत महसूस होगी। लड़कियों के प्रति आकर्षण महसूस होगा। मगर डोर बताते हैं कि बड़े होने के बावजूद उनकी सेक्स में दिलचस्पी पैदा नहीं हो सकी। इसीलिए उन्होंने अपने आपको 'एसेक्सुअल' कहना शुरू कर दिया।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
नब्बे के दशक तक 'एसेक्सुअलिटी' के बारे में चर्चा न के बराबर होती थी। कुछ लोगों ने इस बारे में किताबें लिखी थीं। लेकिन इन किताबों में कीड़े-मकोड़ों और दूसरे जानवरों के बीच 'एसेक्सुअलिटी' की पड़ताल की गई थी। इंसानों की 'एसेक्सुअलिटी' गंभीरता से पड़ताल नहीं हुई थी। इस बारे में पहला गंभीर रिसर्च, कनाडा के एंथनी बोगाएर्ट ने किया, जिन्होंने इस बारे में अपने तजुर्बों पर एक पर्चा छपवाया था। बोगार्ट ने अपना तजुर्बा करीब 18 हजार ब्रिटिश नागरिकों पर किया था। तभी पता चला कि बहुत से ऐसे लोग हैं जिनकी सेक्स में जरा भी दिलचस्पी नहीं। वो समलैंगिक भी नहीं थे। बस उनमें कामेच्छा नहीं थी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ऐसे लोगों को इंसान तक मानने से इनकार कर दिया गया था। साल 2002 में अमरीका में छपे एक पर्चे में कहा गया था कि जो खुद को 'एसेक्सुअल' कहते हैं, असल में वो इंसान ही नहीं। इस पर्चे में कहा गया था कि यौनेच्छा, भगवान का वरदान है और इंसान की सबसे बड़ी पहचान है। असल में 'एसेक्सुआलिटी' को लेकर लोगों का यही दुराव बड़ी वजह है कि वो लोग खुलकर सामने नहीं आते, जिन्हें सेक्स की चाहत नहीं होती।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अमरीका में एक बार ऐसे 169 लोगों से अपना तजुर्बा बताने को कहा गया था। ज्यादातर ने कहा कि जब उन्होंने अपने घर में ये बात बताई तो पहले किसी ने यकीन नहीं किया। फिर कुछ लोगों ने उन्हें समलैंगिक समझा। कुछ लोगों ने ये भी कहा कि जब सही साथी मिल जाएगा तो उन्हें सेक्स की जरूरत और चाहत दोनों महसूस होने लगेगी। बरसों तक समाज के तमाम वर्गों के हमले झेलने वाले समलैंगिक भी 'एसेक्सुआलिटी' से इनकार करते हैं। वो कहते हैं कि 'एसेक्सुआलिटी' जैसी कोई चीज नहीं होती।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
माइकल डोर कहते हैं कि कुछ लोग 'एसेक्सुआलिटी' को ब्रह्मचर्य मान लेते हैं। जबकि ब्रह्मचर्य में और 'एसेक्सुआलिटी' में बहुत फर्क है। ब्रह्मचर्य करने वाला शख्स, सेक्स की जरूरत महसूस करता है। मगर वो अपनी इच्छाओं को दबाता है। वहीं, 'एसेक्सुआलिटी' महसूस करने वाले लोगों को यौनेच्छा महसूस ही नहीं होती। माइकल डोर कहते हैं कि 'एसेक्सुअल' लोग भी कई तरह से विपरीत लिंग के साथी के प्रति लगाव महसूस कर सकते हैं। कुछ लोग गले लगने की जरूरत महसूस करते हैं तो कुछ को इसकी जरूरत भी नहीं लगती। 'एसेक्सुआलिटी' को लेकर लोग भ्रमित भी हुए हैं।

इस बारे में अमरीका में 'एसेक्सुअल विजिबिलिटी ऐंड एजुकेशन नेटवर्क' या एवेन नाम से एक ग्रुप बना है। ये 'एसेक्सुआलिटी' महसूस करने वालों की मदद करता है। इसने जब सेक्स की जरूरत न महसूस करने वालों के बीच सर्वे किया तो दिलचस्प बातें सामने आईं। सर्वे में शामिल 70 फीसद लोगों ने खुद को वर्जिन बताया। 11 फीसद ने कहा कि वो कुंवारे नहीं हैं, मगर फिलहाल सेक्स नहीं कर रहे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सात फीसद ने कहा कि वो सेक्स कर रहे हैं। वहीं 17 फीसद ने कहा कि उन्हें सेक्स के नाम से उबकाई आने लगती है। चार फीसद ने ये भी कहा कि वो सेक्स का आनंद लेते हैं। कनाडा के एंथनी बोगाएर्ट कहते हैं कि 'एसेक्सुआलिटी' या सेक्स की चाहत न होने की और पड़ताल किए जाने की जरूरत है। वो कहते हैं कि 'एसेक्सुआलिटी' को सही से समझकर हम सेक्स और इसकी चाहत महसूस करने वालों के बारे में समझ बेहतर कर सकते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वैसे जिन लोगों ने खुद में सेक्स की चाहत न होने का एलान किया है, समाज उन्हें बुरी नजरों से ही देखता है। उनके साथ कमोबेश वैसा ही बर्ताव होता है जैसा सदियों से समलैंगिकों के साथ होता आया है। इसीलिए अब माइकल डोर और एंथनी बोगाएर्ट जैसे लोग 'एसेक्सुआलिटी' को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने की वकालत करने लगे हैं। वो कहते हैं कि दुनिया को समझना होगा कि कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके लिए सेक्स के बगैर भी जिंदगी में कोई कमी नहीं।
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