प्रतीकात्मक तस्वीर
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क्या कहता है साइंस
और, जब साहिर ने संतोष आनंद के उठाए सवाल का जवाब देने के लिए कलम उठाई तो बहुत कुछ लिख डाला...
अल्लाह-ओ-रसूल का फरमान इश्क है
याने हफीज इश्क है, कुरआन इश्क है
गौतम का और मसीह का अरमान इश्क है
ये कायनात जिस्म है और जान इश्क है
इश्क सरमद, इश्क ही मंसूर है
इश्क मूसा, इश्क कोह-ए-नूर है।
किस्सा मुख्तसर ये कि जिसने जैसा महसूस किया, उसने इश्क-ओ-मोहब्बत को अपने तजुर्बात की बुनियाद पर बयां कर दिया। किसी को भारी पत्थर लगा, तो किसी को नाजुक मिजाज, किसी ने मोहब्बत में खुदा देखा, तो किसी को विलेन नजर आया। मगर साहब, ये बातें ठहरीं शायराना। इश्क के जज्बे को जब साइंसदानों के हवाले किया गया, तो बड़े नीरस तरीके से उन्होंने कह दिया-हुजूर ये आप के जहन का केमिकल लोचा भर है। ज्यादा लोड न लें, इसे लेकर।