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UNICEF: कम उम्र में लड़की की शादी करने की न करें गलती, बेटी के जीवन पर पड़ेगा ऐसा असर

Sun, 15 Jan 2023 03:17 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बाल विवाह - फोटो : Unicef
UNICEF Child Marriage: बाल विवाह एक अपराध है जो बच्चों के अधिकारों का अतिक्रमण करता है। बाल विवाह के कारण हिंसा, शोषण और यौन शोषण का खतरा बढ़ जाता है। लड़कियों और लड़कों दोनों पर ही बाल विवाह का दुष्प्रभाव होता है। हालांकि लड़कियों पर बाल विवाह का अधिक प्रभाव होता है। सबसे पहले तो हमें ये पता होना चाहिए कि लड़के या लड़की का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले होना बाल विवाह की श्रेणी में आता है। बाल विवाह के अंतर्गत औपचारिक विवाह और अनौपचारिक संबंध भी आते हैं, जिसमें 18 साल से कम उम्र के बच्चे शादीशुदा जोड़े की तरह रहते हैं।

भारत में बाल विवाह की स्थिति

अनुमानित तौर पर भारत में हर वर्ष, 18 साल से कम उम्र में करीब 15 लाख लड़कियों की शादी होती है। इस कारण भारत में दुनिया की सबसे अधिक बाल वधुओं की संख्या है। यह संख्या विश्व की कुल संख्या का तीसरा भाग है। एक आंकड़े के मुताबिक, भारत में 15 से 19 साल की उम्र की लगभग 16 प्रतिशत लड़कियां शादीशुदा होती हैं। हालांकि साल 2005-2006 से 2015-2016 के दौरान 18 साल से कम उम्र में शादी करने वाली लड़कियों की संख्या 47 प्रतिशत से घटकर 27 प्रतिशत रह गई है लेकिन यह भी फिलहाल अत्यधिक है।
 
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बाल विवाह - फोटो : unicef
बाल विवाह का दुष्प्रभाव

बाल विवाह आपके बच्चे का बचपन खत्म कर देता है। उम्र से पहले शादी होने पर बच्चा शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से वंचित रह जाता है और इसका नकारात्मक असर होने लगता है। इस नकारात्मकता का सीधा असर लड़के-लड़कियों के साथ ही परिवार और समुदाय पर भी होता है। बाल विवाह का असर आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ्य तीनों पर ही होता है, जो लड़का-लड़की, उनके परिवार, समाज और देश सभी को प्रभावित करता है। ये रहे कम उम्र में बच्चों की शादी करने के दुष्प्रभाव।
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शिक्षा पर असर - फोटो : UNICEF
शिक्षा से वंचित

कम उम्र में बेटी की शादी करने से वह स्कूल से दूर हो जाती हैं। बच्चे पर परिवार की जिम्मेदारियां आ जाती है। अशिक्षा से अज्ञानता बढ़ती है और बच्चों के मस्तिष्क का विकास भी गलत तरीके से होने की संभावना बढ़ती है। वह स्वास्थ्य के प्रति भी लापरवाह हो जाते हैं।

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स्वास्थ्य पर असर - फोटो : Unicef
स्वास्थ्य पर असर

नाबालिग होते हुए उनके गर्भवती होने और बच्चे को जन्म देने की स्थिति आ जाती है। इसका असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है और शिशु के स्वास्थ्य पर भी। अशिक्षा और अज्ञानता के कारण गर्भावस्था और प्रसव के दौरान गंभीर समस्याओं के चलते अक्सर नाबालिग लड़कियों की मृत्यु हो जाती है। एड्स और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी बढ़ जाता है।
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बच्चों के लिए यूनिसेफ की पहल - फोटो : Social Media
आर्थिक असर

बाल विवाह के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ता है और पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों को गरीबी की ओर धकेलता है। जिन लड़कों या लड़कियों की शादी कम उम्र में हो जाती है, उनके पास अपने परिवार की गरीबी दूर करने और देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देने का कौशल नहीं होता। ज्ञान की कमी के कारण नौकरी करने की क्षमता उनमें कम होती है। जल्द शादी से बच्चे भी जल्दी ही होते हैं और घरेलू खर्च का बोझ बढ़ता है।
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बच्चों पर जलवायु परिवर्तन का असर - फोटो : यूनिसेफ इंडिया
बाल विवाह में आई गिरावट

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भारत में बाल विवाह के कमी आई है। इसका कारण अधिक माताओं का साक्षर होना, लड़कियों को शिक्षा का बेहतर अवसर मिलना, सरकार के सख्त कानून और गांव से लोगों का शहरों की ओर पलायन है। इसके अलावा लड़कियों की शिक्षा में तेजी से बढ़ोतरी, नाबालिग लड़कियों के लिए सरकारी योजनाएं और बाल विवाह को गैरकानूनी घोषित करना भी है।
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कम आयु में विवाह - फोटो : Unicef
बाल विवाह को खत्म करने के लिए यूनिसेफ का प्रयास

भारत में बाल विवाह को खत्म करने के लिए यूनिसेफ इसकी जटिलता और इस प्रथा को मज़बूत बनाने वाले सामाजिक, सांस्कृतिक व सरंचनात्मक कारणों को समझता है। यूनिसेफ इंडिया सरकार, अन्य सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर से लेकर जिला स्तर तक कार्य कर रहा है और  बाल विवाह के रोकथाम व किशोर सशक्तिकरण का प्रयास कर रहा है।
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यूनिसेफ - फोटो : UNICEF
ग्लोबल प्रोग्राम टू एक्सीलरेट एक्शन टू एण्ड चाइल्ड मैरिज

इसी कड़ी में यूनिसेफ और यूएनएफपीए ने ‘ग्लोबल प्रोग्राम टू एक्सीलरेट एक्शन टू एण्ड चाइल्ड मैरिज’ के तहत हाथ मिलाया है। इस कार्यक्रम में पहली बार स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल संरक्षण, पोषण और जल व साफ-सफाई पर मौजूदा योजनाओं के साथ बाल विवाह की समस्या को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।
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