पेरेंटिंग टिप्स
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उपमा देकर बात न करें
अभिभावकों की आदत होती है कि वे बच्चों की हरकतों, आदतों और खान-पान को उपमा देकर व्याख्या करते हैं। उन्हें लगता है कि वे मजाक से बच्चों को ऐसा कह रहे हैं, लेकिन इन बातों का बच्चों के व्यक्तित्व पर गहरा असर पड़ता है और उनका आत्मविश्वास कमजोर होता है। उन्हें लगने लगता है कि वे ऐसे ही हैं, क्योंकि उनके माता-पिता उन्हें ऐसा समझते हैं।
तंज कसने से हीन भावना
फैमिली रिलेशनशिप काउंसलर उषा माहेश्वरी कहती हैं, अगर आप बच्चों को सुधारने के लिए उनकी बुरी आदतों पर रोक-टोक करना चाहती हैं तो अपने तरीके पर ध्यान दें। बच्चों को प्यार और सकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल करके समझाएं। उनको ऐसे सकारात्मक लोगों का उदाहरण दें, जो जीवन में सफल रहे हों। उनकी तुलना किसी अन्य बच्चे से न करें। इसके अलावा तंज कसकर बच्चों से कभी बात न करें। इससे उनके अंदर हीन भावना पैदा होती है। अगर आप ऐसा करेंगी तो बच्चे दूसरों को भी इसी नजर से देखेंगे और आत्मविश्वास खो देंगे।