शिखा सिंह
साहित्यकार
बचपन की दोस्ती सबसे खास होती है और जीवन भर साथ निभाने वाली होती है। जो मिठास, अपनापन और सुरक्षा आपको इस दोस्ती में मिलती है, कभी किसी अन्य रिश्ते में नहीं मिलती। ऐसे में आपके छोटे बच्चे भी जीवन में अच्छे और सच्चे मित्र बनाएं, यह जरूरी है।
श्रेया को आज भी अच्छी तरह याद है वो दिन, जब वह नन्हे आदित्य को स्कूल छोड़कर आई थी। वह आदित्य के स्कूल का पहला दिन था। स्कूल के गेट पर उसकी आंखें आंसुओं से डबडबा रही थीं। श्रेया का दिल टूटा जा रहा था। आदित्य को छोड़ते हुए एक बार उसका मन हुआ कि बेटे को वापस ले जाए, पर तभी पीछे से आती एक नन्ही बच्ची ने लपक कर आदित्य का हाथ पकड़ लिया और बोली, “चलो, हम दोनों साथ चलते हैं।” आदित्य की आंखों में एक चमक-सी आ गई और वह उस लड़की का हाथ पकड़कर श्रेया को टाटा करके क्लास में चला गया। उस नन्ही लड़की ने श्रेया के दिल को राहत दे दी थी। घर लौटकर आदित्य ने अपनी नई दोस्त की कई बातें उसे बताई। उसका मन अब स्कूल में लगने लगा था।
यह छोटा-सा महत्वहीन किस्सा अगर सोचा जाए तो बहुत ही खास है। दोस्ती या मित्रता का अपना एक महत्व है। किसी भी बच्चे के संतुलित विकास में दोस्ती महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। अक्सर सुना जाता है कि बचपन की दोस्ती जीवन भर के लिए होती है। अपने रिश्ते हम स्वयं नहीं चुनते, क्योंकि हम जिस भी परिवार में जन्म लेते हैं, उससे जुड़ जाते हैं। रिश्ते पूर्व निर्धारित होते हैं, लेकिन सिर्फ एक ही रिश्ता होता है, जो हम स्वयं चुनते हैं और वह है दोस्ती। पुराणों में भी सच्ची दोस्ती की ढेर सारी मिसालें मौजूद हैं, जो किसी भी रिश्ते से ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हुई हैं, जैसे कि श्री कृष्ण एवं सुदामा और दुर्योधन एवं कर्ण की।
बचपन की मित्रता एक रोपे गए पौधे की तरह होती है। हम एक छोटा-सा पौधा लगाते हैं तो उसे पनप कर एक मजबूत वृक्ष बनने के लिए कुछ मित्रों की जरूरत होती है, जिसमें शामिल होती है सूरज की रोशनी जिससे वह अपना भोजन बनाता है, पानी जो उसकी जड़ों में जाकर उसे मजबूत करता है और खाद, हवा आदि उसके सही विकास के लिए आवश्यक है। हम कह सकते हैं कि पौधे के सच्चे मित्र सूरज, पानी, खाद और हवा हैं। इनमें से किसी एक की भी कमी उसके विकास को अवरुद्ध कर सकती है।
ठीक इसी प्रकार एक छोटा बच्चा भी होता है। उसके संपूर्ण विकास में अच्छे और सच्चे मित्रों की अति महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ज्यादातर बच्चों के मित्र स्कूल में बनते हैं, क्योंकि वे वहां सबसे अधिक समय बिताते हैं। छोटे बच्चे नफा-नुकसान देखकर दोस्ती नहीं करते, वे तो सिर्फ एक-दूसरे की मदद और अपनेपन के लिए दोस्ती करते हैं। बच्चे निश्चल होते हैं, तभी उनको भगवान का रूप कहा जाता है। बचपन में एक-दूसरे के साथ को ही हम महत्व देते हैं और इस कारण अच्छा तालमेल बन जाता है। यही कारण है कि बचपन की दोस्ती सदा के लिए होती है।