Mother-Daughter Relationship Tips : हर मां के लिए उनकी बेटी उनका गुरूर होती है। बिटिया को जन्म देने से लेकर उनकी हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान मां ही रखती हैं। जैसे-जैसे बच्चियां बड़ी होती हैं, उन्हें शारीरिक और मानसिक बदलावों से जूझना पड़ता है। ऐसे टीनेएज बेटियों से दोस्त की तरह बातचीत करना बेहद जरूरी हो जाता है।
अगर मां यह पहल करती है, तो बेटी ना सिर्फ जीवन में आत्मनिर्भर बनती है, बल्कि भविष्य में बेहतर फैसले भी ले पाती है। इसीलिए कहा जाता है कि एक मां और उसकी टीनेज बेटी के बीच संवाद बहुत जरूरी होता है, क्योंकि टीनएज की ये उम्र सबसे संवेदनशील होती है। इसी के चलते हम आपको कुछ ऐसी बातों के बारे में बताएंगे, जो आपको अपनी बेटी से अवश्य करनी चाहिए।
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आत्मसम्मान की अहमियत
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आत्मसम्मान की अहमियत
अक्सर घरों में लड़कियों को सिखाया जाता है कि कोई कुछ भी कहे, पर तुम्हें कभी जवाब नहीं देना है। जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। अपनी बिटिया को सिखाएं आत्मसम्मान की अहमियत क्या है। आत्मसम्मान बेहद जरूरी है। अपनी बेटी को सिखाएं कि यदि कोई आपकी इज्जत नही करता है, तो ऐसे व्यक्ति को तुरंत जवाब देकर उन्हें उनका दायरा बताएं।
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पीरियड्स के बारे में करें खुलकर बात
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पीरियड्स के बारे में करें खुलकर बात
टीनएज बच्चों के शरीर में काफी बदलाव होते हैं। खासतौर पर अगर आपके घर में बेटी है तो उससे पर्सनल हाइजीन, पीरियड्स बॉडी चेंजेस और सेक्स एजुकेशन से जुड़ी जरूरी जानकारी दें ताकि वह किसी भ्रम या डर का शिकार न हो। उन्हें बताएं कि पीरियड्स कोई बीमारी नहीं है, बल्कि ये एक शारीरिक प्रक्रिया है, जो बेहद जरूरी है।
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गुड टच बैड टच समझाएं
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गुड टच बैड टच समझाएं
ये बात आपकी बच्ची को बहुत छोटे से बता देनी चाहिए। वैसे तो गुड टच और बैड टच की शिक्षा स्कूल में ही मिल जाती है, लेकिन फिर भी अपनी बेटी को सही और गलत तरीके से छूने की पहचान बताएं। उन्हें ये भी बताएं कि यदि कोई उनके साथ ऐसा करता है, तो इस बात की शिकायत तुरंत अपने माता-पिता से करें।
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सीमाओं के बारे में समझाएं
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सीमाओं के बारे में समझाएं
यदि आपके घर में बेटी है तो उन्हें उनकी सीमाओं के बारे में भी बताएं। उन्हें बताएं कि दोस्ती, आकर्षण और प्यार में काफी फर्क होता है। इन तीनों चीजों में एक दायरा होता है, जिसके बारे में सही समझ होना जरूरी होते हैं।
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'न का मलतब न' ये अवश्य सिखाएं
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'न का मलतब न' ये अवश्य सिखाएं
ये सबसे अहम बात है, जो आपकी बिटिया को पता होनी चाहिए। इसके लिए आपकी बेटी में ‘ना’ कहने का हक़ और हिम्मत दोनों होनी चाहिए। उन्हें बताएं कि यदि कोई चीज पसंद नहीं आ रही है, तो सामने वाले को क्लीयर न कहें। यदि आपकी न को कोई सीरियसली नहीं ले रहा है तो उन्हें बताएं कि वो घरवालों से बात कर सकती हैं।
उन्हें बताएं कि आप उनकी दोस्त हैं
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उन्हें बताएं कि आप उनकी दोस्त हैं
सबसे आखिर में अपनी बिटिया को यकीन दिलाएं कि आप उनकी दोस्त हैं। ऐसे में वो जब चाहें किसी भी बारे में अपनी मां से बात कर सकती हैं। बिना किसी डर या शर्म के अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में भी वो आपके साथ खुलकर बात कर सकती हैं।