अंग्रेजी पढ़ने-लिखने वाले मोहन की पत्नी अनपढ़ हो, यह मोहनदास को अच्छा नहीं लगता था, लिहाजा बापू ने शुरुआती जीवन में कस्तूरबा को पढ़ाने की भी कोशिश की। निरक्षर होने के बावजूद कस्तूरबा गांधी बुद्धिजीवी महिला थीं। गांधी जी ने भी स्वीकार किया था कि ‘जो लोग मेरे और बा के संपर्क में आए, उनमें अधिक संख्या ऐसे लोगों की है, जो मेरी अपेक्षा बा पर कई गुना अधिक श्रद्धा रखते हैं।’