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Dussehra 2023: दशरथ नंदन जैसा आदर्श बेटा चाहिए? श्रीराम के गुणों को अपनाने के लिए करें बच्चे को प्रेरित

Tue, 24 Oct 2023 07:59 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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श्रीराम के गुण - फोटो : amar ujala
Dussehra 2023: शारदीय नवरात्रि के समापन के अगले दिन दशहरा का पावन पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष दशहरा 24 अक्तूबर 2023 को मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में दशहरा का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु के अवतार श्री रामचंद्र ने लंका नरेश रावण का वध करके असत्य और अधर्म पर विजय प्राप्त की, इसलिए इस पर्व को विजयदशमी भी कहते हैं।

भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाने वाले भगवान श्रीराम को एक आदर्श पुरुष कहा जाता है। श्री राम के नाम के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम जुड़ा है, क्योंकि वह हमेशा मर्यादा का पालन करते रहे। वह एक श्रेष्ठ राजा, आदर्श बेटे, उच्च कोटि के शिष्य, आदर्श भाई और पति थे, जिन्हें युगांतर तक उनके इसी रूप में याद किया जाएगा।

पूरा जीवन श्रीराम सत्य, धर्म, दया और मर्यादा के पथ पर चले। इसी कारण उनके राज को 'राम राज्य' कहा गया। हर कोई उम्मीद करता है कि 'बेटा हो तो राम जैसा', राजा हो तो राम जैसा', चरित्र हो तो राम जैसा'। ऐसे में अगर आप भी चाहते हैं कि आपका बेटा राम जैसा बने और समाज का एक आदर्श पुरुष बनें तो उन्हें प्रभु श्रीराम के गुणों के बारे में बताएं।
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lord rama
श्री राम के गुण

दयालु राम

भगवान श्री रामचंद्र बहुत दयालु थे। उनकी सेना में मानव के अलावा पशु और दानव सभी थे। उन्होंने सुग्रीव को राजा बनाया। हनुमान, जामवंत और नल-नील को अपनी सेना का नेतृत्व करने का अधिकार दिया। बिना जाति, वर्ग का भेद किया दोस्ती का रिश्ता निभाया। शबरी के जूठे बेर मुस्कुराते हुए खाए। यह श्रीराम के दयालु आचरण का ही उदाहरण है।
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lord rama - फोटो : iStock
सहनशील और धैर्यवान

भगवान श्रीराम का एक विशेष गुण उनकी सहनशीलता और धैर्य है। चाहे माता कैकेयी के कहने पर 14 वर्ष का वनवास हो, या माता सीता को त्यागने के बाद राजा होते हुए भी संन्यासी की तरह जीवन बिताना हो, श्रीराम ने सदैव सहनशीलता और धैर्य के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया।

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भगवान राम और भजन
बेहतर प्रबंधन

श्री राम एक आदर्श राजा होने के साथ ही कुशल प्रबंधक भी थे। उन्होंने लंका जाने के लिए अपनी सेना के साथ मिलकर पत्थर का सेतु बनाया था। उसके लिए बेहतर प्रबंधन किया। उनकी सेना में पशु और मनुष्य दोनों शामिल थे। उनके बीच का प्रबंधन, अपने राज को रामराज्य बनाने के लिए किया गया बेहतर प्रबंधन उन की कुशलता को दर्शाता है।
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भगवान राम और उनके भाई भरत (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
आदर्श बेटा और भाई

श्रीराम माता कौसल्या के पुत्र थे, लेकिन कैकयी के प्रिय थे। सबसे अधिक वह माता कैकयी के करीब रहते थे। जब माता कैकयी ने उन्हें अयोध्या के राजा का पद त्यागने को कहा तो वह आरामदायक जीवन छोड़कर 14 वर्ष के वनवास के लिए चले गए।ऐसा करके उन्हें एक आदर्श बेटे का धर्म निभाया और अपने सौतेले भाई भरत के लिए राजपाठ का परित्याग कर भाई प्रेम दिखाया। वह अपने तीनों भाइयों को सगे भाई से बढ़कर प्यार करते थे। 
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