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नई रिसर्च में खुलासा: शरीर से क्यों आती है दुर्गंध? आदिमानव के समय से है एक ही कारण, जानकर होगी हैरानी

Thu, 30 Jul 2020 04:51 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शरीर से बदबू (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
क्या आपने अपने शरीर की महक महसूस की है? आप सोच रहे होंगे कि ये कैसा बेतुका सवाल है! लेकिन कई बार आपके साथ ऐसा हुआ होगा कि आप कहीं बाहर से आए हों और फिर घर में किसी ने कह दिया हो कि दूर हटो, गंध आ रही है। आमतौर पर माना जाता है कि पसीने की वजह से या फिर नहीं नहाने और गंदगी की वजह से ऐसा होता है। लेकिन असली कारण ये नहीं है। शरीर से दुर्गंध क्यों आती है, इसको लेकर वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च की है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क ने यूनिलिवर के साथ मिलकर यह रिसर्च की है और शरीर से बदबू आने का कारण पता किया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • यूनिलिवर संग ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क की गई इस रिसर्च में वैज्ञानिकों का कहना है कि शरीर से दुर्गंध आने के पीछे का कारण एक एंजाइम है जिसे आर्मपिट (बांह के बगल) में पाई जाने वाली बैक्टीरिया तैयार करती है। यही शरीर से दुर्गंध आने के लिए जिम्मेदार होता है। शोधकर्ताओं ने इसे बीओ एंजाइम नाम दिया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि स्ट्रेफायलोकोकस होमिनिस बैक्टीरिया एक खास तरह का रसायन रिलीज करती है। यही शरीर से बदबू आने का कारण होता है। यह बैक्टीरिया मानव शरीर में अभी से नहीं, बल्कि आदिमानव के काल से ही है। यही वजह है कि इस बैक्टीरिया ने पीढ़ी दर पीढ़ी इंसानों के आर्मपिट में अपनी जगह बनाई है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि शरीर की एपोक्राइन ग्रंथि के कारण बैक्टीरिया पनपीं। यह ग्रंथि हमारी त्वचा से जुड़ी होती है और बालों वाले रोम छिद्रों के जरिए शरीर से पसीना बाहर निकालती है। यह ग्रंथि आर्मपिट के अलावा हमारी चेस्ट यानी छाती और जननांगों के आसपास भी पाई जाती है। ये शरीर के लिए इसलिए भी जरूरी हैं क्योंकि इनकी मदद से ही शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।
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शरीर से बदबू
  • शोधकर्ता डॉ. गॉर्डन जेम्स के मुताबिक, इस रिसर्च में कई तरह की नई बातें सामने आई हैं। इस दौरान शोधकर्ताओं ने उस एंजाइम को खोजा, जो सिर्फ आर्मपिट में बैक्टीरिया बनाती हैं और लाखों सालों से इंसानों में मौजूद हैं। इसकी पहचान होने से कई फायदे हैं। जैसे कि अब इसी एंजाइम के हिसाब से डियोड्रेंट तैयार किए जा सकेंगे ताकि इसे न्यूट्रिलाइज किया जा सके और शरीर से बदबू न आए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • एक अन्य शोधकर्ता डॉ. माइकल रुडेन के मुताबिक, बीओ एंजाइम की संरचना के अलावा साथ अन्य बैक्टीरिया की संरचना भी समझी जा सकी है, जो एंजाइम तैयार करती हैं। यह रिसर्च इस बारे में भी जानकारी देती है कि शरीर की दुर्गंध कैसे काम करती है और बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाए बगैर इसे कैसे रोका जा सकता है।
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