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प्रेम कहानी: जब शादी के बीच खड़ी हो गई थी धर्म की दीवार, जानें फिर कैसे हुए थे एक दूजे के मिल्खा सिंह और निर्मल कौर

Sat, 19 Jun 2021 11:54 AM IST
प्रकाश चंद जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मिल्खा सिंह - फोटो : Amar ujala and Social Media
महान धावक मिल्खा सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे। चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में शुक्रवार रात को उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली और 91 साल की उम्र में इस दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। इस खबर के सामने आते ही खेल जगत से लेकर पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई बड़े नेताओं समेत सेलिब्रिटी ने शोक व्यक्त किया है। पूरे देश की आंखें नम हैं, क्योंकि उन्होंने मिल्खा सिंह को खो दिया है। भले ही फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह इस दुनिया से जा चुके हैं, लेकिन पीछे वो कई यादें छोड़कर गए हैं। फिर चाहे वो उनके खेल से जुड़ी हों या फिर उनकी प्रेम कहानी की हो, क्योंकि मिल्खा सिंह की प्रेम कहानी किसी फिल्म की लव स्टोरी से कम नहीं है। लेकिन शायद आप उनकी प्रेम कहानी के बारे में न जानते हों। तो चलिए आपको फ्लाइंग सिख की प्रेम कहानी के बारे में बताते हैं।
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मिल्खा सिंह - फोटो : amar ujala
पहले पत्नी, अब मिल्खा सिंह का निधन
  • मिल्खा सिंह की पत्नी का नाम निर्मल कौर है, जिनका निधन कोरोना की वजह से 13 जून 2021 को हुआ था। अब इसे इत्तेफाक कहें या कुछ और, लेकिन पत्नी के जाने के महज पांच दिन के अंतराल पर ही मिल्खा सिंह भी इस दुनिया को अलविदा कह बैठे। पहले निर्मल कौर और अब मिल्खा सिंह करोड़ों लोगों की आंखें नम कर गए, और पीछे छोड़ गए सिर्फ यादें।
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मिल्खा सिंह - फोटो : social media
पहली नजर में दे बैठे थे दिल
  • श्रीलंका के कोलंबो में साल 1955 में भारत की वॉलीबॉल खिलाड़ी और टीम की कप्तान निर्मल कौर से मिल्खा सिंह की पहली मुलाकात हुई थी। मिल्खा सिंह और निर्मल कौर, दोनों ही कोलंबो में एक टूर्नामेंट में हिस्सा लेने पहुंचे थे। यहां एक भारतीय बिजनेसमैन ने टीम के लिए डिनर आयोजित किया था, तो इस पार्टी में ही मिल्खा सिंह ने निर्मल कौर को देखा था, और देखते ही वो उन्हें अपना दिल दे बैठे थे।

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मिल्खा सिंह - फोटो : amar ujala
हाथ पर लिख दिया था होटल का नंबर
  • अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने इस बात का जिक्र करते हुए कहा था कि, निर्मन को देखते ही मैंने पसंद कर लिया था। हमारे बीच काफी बातें भी हुईं। हालांकि, पास में कोई कागज नही था, तो मैंने निर्मल के हाथ पर होटल का नंबर लिख दिया था।
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मिल्खा सिंह - फोटो : amar ujala
  • इसके बाद साल 1958 में दोनों की मुलाकात फिर से हुई, लेकिन प्यार की गाड़ी ने चलना तो 1960 में शुरू किया। जब दोनों की मुलाकात दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में हुई। इसके बाद सिलसिला आगे बढ़ता गया, और इसके बाद प्यार का इजहार भी हो चुका था। ऐसे में अब इस रिश्ते को एक नाम देना बचा था यानी शादी करना।
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मिल्खा सिंह - फोटो : social media
  • उस वक्त तक मिल्खा सिंह एक बड़ा नाम हो चुके थे। लेकिन उनकी शादी में अड़चन उनके ससुर ही बन रहे थे, क्योंकि वो इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे। इसके पीछे की वजह थी धर्म, क्योंकि जहां मिल्खा सिंह सिख परिवार से नाता रखते थे, तो वहीं निर्मल हिंदू परिवार से आती थी। ऐसे में शादी में अड़चन आना स्वाभाविक था, लेकिन वो कहते हैं न कि जोड़ियां तो रब के घर से बनकर आती हैं। ऐसे में इन्हें बनाने या बिगाड़ने वाले हम कौन होते हैं।
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मिल्खा सिंह - फोटो : amar ujala
  • इसलिए उस वक्त मिल्खा सिंह और निर्मल कौर की शादी के लिए पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों मसीहा बनकर सामने आए। उन्होंने परिवार वालों को समझाया, जिसके बाद साल 1962 में दोनों शादी के पवित्र बंधन में बंध गए।
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मिल्खा सिंह - फोटो : social media
अक्सर कई सार्वजनिक तौर पर मिल्खा सिंह अपनी पत्नी की तारीफ करते हुए कह चुके हैं कि वे खुद 10वीं पास हैं, लेकिन बच्चों को पढ़ाने और संस्कार देने में उनकी पत्नी निर्मल का ही अहम रोल रहा है। मिल्खा सिंह अपनी पत्नी निर्मल को सबसे बड़ी ताकत मानते थे।
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