14 अगस्त 1947 की रात ठीक 11 बजकर 55 मिनट पर संसद के सेंट्रल हॉल में जैसे ही पंडित जवाहरलाल नेहरू की आवाज गूंजी, 'आधी रात के समय जब पूरी दुनिया सो रही है, भारत आजादी की सांस ले रहा है' और घड़ी में रात के 12 बजे, तो वहां मौजूद लोगों की आंखों से बरबस ही आंसू बह निकले। ये वो क्षण था, जिसका इंतजार हर भारतीय सालों से कर रहा था। अंग्रेज अफसर लॉर्ड माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल बने थे। 15 अगस्त 1947 को उन्होंने भी भारत के तिरंगे झंडे को सलामी दी थी। माउंटबेटन ने मंच से करीब 25 गज की दूरी से अपनी बग्घी पर ही खड़े-खड़े झंडे को सैल्यूट किया था, क्योंकि वहां इतनी भीड़ थी कि उन्हें बग्घी से उतरने का मौका ही नहीं मिला था। तिरंगे को सलामी देते उनकी तस्वीर आज भी सोशल मीडिया पर तैरती रहती है।