गांधी जी आधुनिक सभ्यता और विचारों के मुखर आलोचक थे। उनका कहना था कि आधुनिकीकरण का जितना गहरा प्रभाव मनुष्य पर पड़ता है उतना ही असर पर्यावरण पर भी होता है।
पर्यावरण का विदोहन करके मुठ्ठी भर लोग ही धनी हो सकते हैं, जो केवल कुछ धन और सांसारिक सुख के लालच में ऐसा करते हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की सोच उस काल से कितनी आगे थी ये इस बात से प्रमाणित होता है कि वर्तमान समय में हो रहे शहरीकरण को लेकर गांधी जी ने चिंता व्यक्त की थी कि शहरीकरण के कारण गांव कुछ दिन में विलुप्त हो जाएंगे। और ये बात आज के संदर्भ में बिल्कुल सत्य साबित हो रही है। बहुत से पश्चिमी पर्यावरणविद् जहां ये कहते हैं कि 'प्रकृति के पास वापस लौटो' वहीं गांधी जी का कहना था कि 'गांवों की तरफ लौटो।'