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सावधान: कोरोना के बाद अब 'फ्रीजिंग वायरस' से नई महामारी को लेकर वैज्ञानिकों का अलर्ट, बन सकता है बड़ा खतरा

Sun, 28 Jan 2024 12:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जोंबी वायरस का खतरा - फोटो : iStock
कोरोनावायरस पिछले चार साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिमों का कारण बना हुआ है। वैक्सीनेशन और हर्ड इम्युनिटी ने दुनियाभर में संक्रमण के कारण गंभीर रोगों के खतरे को तो कम कर दिया है, पर वायरस में म्यूटेशन और नए वैरिएंट्स के कारण संक्रमण की दर अब भी चिंता का कारण बनी हुई है। मसलन कोरोना महामारी को अब भी खत्म नहीं माना जा सकता है।

इस बीच वैज्ञानिकों ने दुनियाभर को एक नई संभावित महामारी को लेकर आगाह किया है। वैज्ञानिकों ने अलर्ट किया है कि हमें एक नई और विचित्र महामारी के खतरे को लेकर अभी से सावधान रहना चाहिए। इसके लिए जोंबी वायरस को संभावित कारण माना जा रहा है। शोधकर्ताओं ने बताया कि बर्फ के बड़े हिस्से के नीचे जोंबी वायरस मिलने की खबरें हैं, आर्कटिक पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से ये वायरस निकल सकते हैं, जिससे एक बड़ी बीमारी का प्रकोप और नई वैश्विक चिकित्सा आपात की स्थिति पैदा होने का भी खतरा हो सकता है।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण इस वायरस के फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
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संभावित जोंबी वायरस का खतरा - फोटो : iStock
जोंबी वायरस से संक्रमण का खतरा

ऐक्स-मार्सिले यूनिवर्सिटी में आनुवंशिकीविद् जीन-मिशेल क्लेवेरी कहते हैं, फिलहाल, महामारी के खतरों का विश्लेषण उन बीमारियों पर केंद्रित है जो दक्षिणी क्षेत्रों में उभर सकती हैं और फिर उत्तर में फैल सकती हैं। ये वायरस मनुष्यों को संक्रमित करने और एक नई बीमारी का प्रकोप शुरू करने की क्षमता रखते हैं।

इरास्मस मेडिकल सेंटर के वायरोलॉजिस्ट मैरियन कूपमैन्स ने इससे सहमति जताई और कहा, हम नहीं जानते कि पर्माफ्रॉस्ट में कौन-कौन से वायरस पड़े हैं। हालांकि, मुझे लगता है कि यह बड़ा जोखिम है जो  बीमारी फैलने में सक्षम हो सकता है।
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वायरस के संक्रमण को लेकर जोखिम - फोटो : Pixabay
ग्लोबल वार्मिंग के कारण फैल सकता है वायरस

संक्रामक रोग विशेषज्ञ बताते हैं, ग्लोबल वार्मिंग में वृद्धि के साथ, कई ग्लेशियर और पर्माफ्रॉस्ट वर्षों से लगातार पिघल रहे हैं। इस अपरिवर्तनीय पर्माफ्रॉस्ट पिघलन ने वर्षों से बर्फ में जमे कई बैक्टीरिया और वायरस को मुक्त कर दिया है। पिघली हुई बर्फ से पुनर्जीवित हुआ ऐसा ही एक वायरस है जॉम्बी वायरस। इस प्रकार के वायरस बर्फ के अंदर फंसे रहने के कारण निष्क्रिय रहते हैं, लेकिन ये फिर से सक्रिय होकर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ाने की क्षमता रखते हैं।

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नए वायरस से महामारी का खतरा - फोटो : iStock
हजारों साल पुराने वायरस हो सकते हैं फिर से सक्रिय

साल 2014 में वैज्ञानिकों की एक टीम ने साइबेरिया में जीवित वायरस पर किए शोध में पाया कि वर्षों बाद भी ये वायरस एकल-कोशिका जीवों को संक्रमित कर सकते हैं, भले ही वे हजारों वर्षों से पर्माफ्रॉस्ट में दबे हुए हों। पिछले साल प्रकाशित शोध में बताया गया है कि साइबेरिया में सात अलग-अलग साइटों से कई वायरस के अस्तित्व का पता चला और जो मानवों में गंभीर रूप से संक्रमण का जोखिम बढ़ाने वाले हो सकते हैं।

एक वायरस का सैंपल 48,500 साल पुराना था, जो अब भी एक्टिव होकर गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बन सकता है।
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संक्रामक रोगों से बचाव को लेकर वैज्ञानिक अलर्ट - फोटो : iStock
अलर्ट वैज्ञानिक पर

वैज्ञानिकों का मानना है कि पर्माफ्रॉस्ट में ऐसे वायरस हो सकते हैं जो दस लाख साल तक पुराने हैं। प्रोफेसर क्लेवेरी कहते हैं, हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली कभी भी इन रोगाणुओं के संपर्क में नहीं रही होगी और यह एक और चिंता की बात है। एक अज्ञात वायरस के संपर्क में आने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पर गंभीर असर हो सकता है, जैसा कि कोरोना की शुरुआत में देखा गया था। फिर भी कोरोना के वैरिएंट्स दशकों पहले संक्रमण का कारण बन चुके थे।  

नए वायरस के कारण जोखिमों को कम करने, शुरुआती मामलों की पहचान और उन्हें स्थानीय स्तर पर ठीक करने के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम अभी से प्रयास कर रही है।



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स्रोत और संदर्भ
Arctic zombie viruses in Siberia could spark terrifying new pandemic

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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