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Covid-19 Study: वैक्सीनेशन के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं लक्षण, जानिए आपमें किस तरह के जोखिम का खतरा?

Sun, 25 Dec 2022 04:18 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के लक्षणों के बारे में जानिए - फोटो : istock
चीन में इन दिनों कोरोना के कारण दिख रही तबाही पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। अध्ययनों से पता चलता है कि ओमिक्रॉन का सब-वैरिएंट BF.7 अधिक संक्रामकता के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली को आसानी से चकमा देने में सफल हो रहा है, इसने लोगों के डर को और भी बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना के इस खतरे से बचे रहने के लिए सभी लोगों को बचाव के उपाय करते रहने चाहिए, जिन लोगों को वैक्सीन की दो डोज लग चुकी है, उन्हें बूस्टर डोज लगवाने की सलाह दी जा रही है। BF.7 अधिक संक्रामकता वाला वैरिएंट जरूर है पर थोड़ी सी सावधानी बरतकर इससे बचाव किया जा सकता है।

BF.7 की प्रकृति को लेकर हुए अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादातर लोगों में इसके कारण हल्के लक्षण ही देखे जा रहे हैं, गंभीर लक्षणों या रोग का खतरा सिर्फ उन लोगों में है जिनका वैक्सीनेशन नहीं हुआ है या फिर जिन लोगों को कोमोरबिडिटी है।

इस बीच एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि वैक्सीनेशन स्टेटस के आधार पर भी लोगों में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि इस आधार पर लोगों को किस तरह की समस्याओं का अनुभव हो सकता है?
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टीकाकरण वालों में भी दिख सकते हैं कोरोना के लक्षण - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड और किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित COVID-19 ट्रैकर, ज़ो हेल्थ स्टडी में वैक्सीनेशन स्टेटस के आधार पर अलग-अलग तरह के लक्षणों के बारे में पता चलता है। वैक्सीनेशन स्टेटस का मतलब आपको वैक्सीन की कितनी डोज लगी है।

शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि जिन लोगों को वैक्सीन की दो डोज लग चुकी है, यानी कि जिनका टीकाकरण पूर्ण हो चुका है ऐसे ज्यादातर लोगों को या तो सर्दी-खांसी जैसे हल्के लक्षण हो रहे हैं या फिर लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं। यानी कि टीकाकरण करा चुके लोगों में गंभीर रोग का खतरा नहीं देखा जा रहा है। 
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वैक्सीनेटेड लोगों में कैसे होते हैं लक्षण - फोटो : iStock
वैक्सीन की एक डोज लेने वालों में लक्षण

जो कोविड हेल्थ स्टडी में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को वैक्सीन की केवल एक ही डोज लगी है, ऐसे लोगों में सामान्य लक्षण हो सकते हैं, पर फिर भी यह आपको गंभीर रोग से बचाने में सहायक है। ऐसे लोगों में सिरदर्द, छींक आना, नाक बहने, लगातार खांसी आने और गले में खराश जैसी दिक्कतों का अनुभव हो सकता है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि सिंगल शॉट वैक्सीन कोरोना के खतरे से बचाने में बहुत प्रभावी नहीं है।

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कोरोना के लक्षणों के बारे में जानिए - फोटो : iStock
वैक्सीन की दो डोज ले चुक लोगों में लक्षण

जो कोविड हेल्थ स्टडी में पाया गया है कि जिन लोगों का वैक्सीनेशन पूरा हो चुका है ऐसे लोगों में संक्रमण की स्थिति में गंभीर रोग होने का जोखिम कम होता है। इस तरह के लोगों ने गला खराब होने, खांसी आने, नाक बहने या बंद नाक के अलावा सिरदर्द की समस्याओं के बारे में बताया है। वहीं एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके ज्यादातर लोगों में  BF.7 संक्रमण की स्थिति में लक्षण नजर नहीं आते हैं।
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संक्रमण के गंभीर लक्षणों के बारे में जानिए - फोटो : iStock
बिना वैक्सीनेशन वाले हो सकते हैं गंभीर रोग के शिकार

शोधकर्ताओं ने पाया कि चूंकि ओमिक्रॉन वैरिएंट्स के कारण गंभीर लक्षणों का जोखिम कम देखा जा रहा है, ऐसे में जिन लोगों को वैक्सीनेशन नहीं हुआ है उनमें भी BF.7 संक्रमण की स्थिति में सिरदर्द, छींक आना, नाक बहने, लगातार खांसी आने और गले में खराश जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। हालांकि ऐसे लोगों की सेहत के आधार पर इन लक्षणों के गंभीर रूप लेने का खतरा अधिक रहता है।

बिना टीकाकरण वाले लोगों में यह फेफड़ों की समस्या और अन्य अंगों के लिए भी दिक्कतें बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है। 
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संक्रमण में स्वाद-गंध न आने की समस्या - फोटो : iStock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

तीनों समूहों पर किए गए अध्ययन के विश्लेषण में शोधकर्ता बताते हैं, ओमिक्रॉन के कारण फिलहाल गंभीर लक्षण कम देखे जा रहे हैं। सांस की तकलीफ वैक्सीनेटेड या बिना वैक्सीनेशन, दोनों समूह वालों में 29-30वें सबसे आम लक्षण के रूप में रैंक की गई है। नए वैरिएंट्स से संक्रमण की स्थिति में स्वाद या गंध न आने जैसे लक्षणों की आशंका भी काफी कम देखी गई है।

शोधकर्ताओं ने कहा, हम बूस्टर शॉट वाले लोगों के डेटा की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उनके लक्षणों में किस तरह का बदलाव है, यह देखना दिलचस्प होगा।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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