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World Polio Day 2023: पोलियो मुक्त है भारत पर पड़ोसी देशों में अब भी खतरा, जानिए इस रोग के बारे में विस्तार से

Tue, 24 Oct 2023 11:27 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विश्व पोलियो दिवस 2023 - फोटो : iStock
पोलियो वायरस से संक्रमण के कारण होने वाला पोलियो रोग वैश्विक स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य संकट रहा है। इस रोग के टीके और जागरूकता के चलते ज्यादातर देशों ने संक्रमण को रोकने में जीत हासिल कर ली है। भारत भी पोलियो मुक्त देशों में है, 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल में संक्रमण का आखिरी केस रिपोर्ट किया गया था। इस रोग के प्रति प्रतिरक्षा को बढ़ाने के लिए भारत सरकार 5 साल से कम उम्र के बच्चों को पोलियो की ओरल वैक्सीन मुफ्त देती है। 

वैश्विक स्तर पर पोलियों के जोखिमों को कम करने और इससे बचाव को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 24 अक्तूबर को विश्व पोलियो दिवस मनाया जाता है।  यह मेडिकल शोधकर्ता जोनास साल्क का जन्मदिन भी है जिन्होंने पोलियो वैक्सीन विकसित करने वाली पहली टीम का नेतृत्व किया था।

वैसे तो दुनिया के ज्यादातर देशों से पोलियो लगभग खत्म हो गया है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक 2022 तक भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पोलियो टाइप-1 के मामले रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। आइए इस संक्रामक रोग के बारे में जानते हैं।
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पोलियोवायरस के कारण संक्रमण का खतरा - फोटो : iStock
पोलियो संक्रमण के बारे में जानिए

पोलियो रोग, पोलियोवायरस के कारण होने वाली बीमारी है जो मुख्यरूप से रीढ़ की हड्डी या मस्तिष्क के स्टेम में नसों को प्रभावित करती है। पोलियो संक्रमण के कारण अपंगता का खतरा हो सकता है, इसके लक्षण लकवा जैसे दिखते हैं। कुछ लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है, इसके कारण मौत का भी जोखिम रहता है।

दुनियाभर में टीकाकरण के प्रयासों के चलते हाल के वर्षों में संक्रमण के मामले काफी कम हुए हैं। हालांकि कुछ देश अब भी इस समस्या के शिकार हैं।
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पोलियो के कारण लकवा की समस्या - फोटो : istock
कैसे होता है ये संक्रमण?

पोलियोवायरस, मुख्यरूप से रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क स्टेम में तंत्रिका कोशिकाओं को लक्षित करता है जो मांसपेशियों की गति को नियंत्रित करते हैं। 

पोलियो वायरस से संक्रमित लोग जिनमें इसके लक्षण नहीं भी हैं, उनके कारण भी अन्य लोगों में संक्रमण का जोखिम हो सकता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शौच, छींकने या खांसने से निकलने वाली ड्रॉपलेट के माध्यम से दूसरों में आसानी से फैल सकता है। 

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पोलियो संक्रमण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : iStock
पोलियो संक्रमण के लक्षणों के बारे में जानिए

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक पोलियोवायरस से संक्रमित 70 से 95 फीसदी लोगों में इसके कोई लक्षण नहीं होते हैं।

शुरुआती लक्षणों में बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, गर्दन में अकड़न और हाथ-पैर में दर्द की समस्या होती है। 200 में से एक संक्रमित में लकवा (आमतौर पर पैरों में) हो सकता है। लकवाग्रस्त व्यक्तियों को यदि सांस लेने में कठिनाई है तो ऐसे 5-10% की मृत्यु का भी खतरा रहता है। पोलियो मुख्यरूप से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है।
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पोलियो से बचाव के लिए टीकाकरण - फोटो : istock
पोलियो का इलाज और बचाव

पोलियो का कोई इलाज मौजूद नहीं है, इसलिए संक्रमितों में इसके लक्षणों और जटिलताओं को कम करने पर ध्यान दिया जाता है। इसके लिए दर्द निवारक दवाइयां, मांसपेशियों में दर्द-ऐंठन को नियंत्रित करने के लिए सेकाईं करने, रोगियों को आराम करने और पौष्टिकता पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। हड्डी की विकृति और मांसपेशियों की कार्यक्षमता में सुधार के लिए फिजियोथेरेपी से लाभ मिल सकता है। 

पोलियो के टीके बच्चों के शरीर को पोलियो वायरस से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा विकसित करने में मदद करते हैं। इसके अलावा हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना भी संक्रमण के जोखिमों को कम करने में मददगार है। 



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स्रोत और संदर्भ
Poliomyelitis (polio)


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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