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World Osteoporosis Day: ऑस्टियोपोरोसिस में बहुत कमजोर हो जाती हैं हड्डियां, छीकनें-खांसने से भी टूटने का खतरा

Thu, 19 Oct 2023 07:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हड्डियों की बीमारियों का जोखिम - फोटो : iStock
लाइफस्टाइल में गड़बड़ी और आहार में पौष्टिकता की कमी के कारण शरीर पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है, ये हड्डियों की सेहत को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती हुई देखी जा रही है। लिहाजा आर्थराइटिस, हड्डियों के घनत्व में कमी, फ्रैक्चर होने और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ रहा है।

ऑस्टियोपोरोसिस, हड्डियों की कमजोरी और इसके भंगुर होने के खतरे को बढ़ाने वाली समस्या है। एक अनुमान के मुताबिक दुनियाभर में 200 मिलियन (20 करोड) से अधिक लोग इस गंभीर समस्या के शिकार हैं। इस रोग के बढ़ते मामलों को बारे में लोगों को जागरूक करने और बचाव को लेकर लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल 20 अक्तूबर को वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे मनाया जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों की गंभीर समस्या है, ये हड्डियों को इतनी कमजोर कर देती है कि हल्के से गिरने-झुकने या खांसने-छींकने के कारण भी हड्डियों में फ्रैक्चर का खतरा हो सकता है। कूल्हे, कलाई या रीढ़ की हड्डी में इस तरह का जोखिम सबसे अधिक देखा जाता है। आइए इस समस्या के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है खतरनाक - फोटो : iStock
ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में जानिए

हमारी हड्डियों की कोशिकाओं का लगातार ब्रेक डाउन और निर्माण होता रहता है। हालांकि ऑस्टियोपोरोसिस की स्थिति में हड्डियों की क्षति तो हो रही होती है लेकिन नई कोशिकाओं का निर्माण नहीं हो पाता है। ये स्थिति हड्डियों को काफी कमजोर कर देती है और घनत्व कम होने के कारण इसके आसानी से टूटने का जोखिम काफी अधिक हो सकता है।

ऑस्टियोपोरोसिस पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करता है, हालांकि रजोनिवृत्ति से गुजर रही और वृद्ध महिलाओं में इसका जोखिम सबसे अधिक होता है।
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ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay
कैसे जानें कहीं आपको ऑस्टियोपोरोसिस तो नहीं?

डॉक्टर बताते हैं, ऑस्टियोपोरोसिस के शुरुआती स्थिति में हड्डियों को हो रही क्षति के आमतौर पर कोई लक्षण नहीं होते हैं, समय के साथ जैसे-जैसे हड्डियां कमजोर होती जाती हैं, इस स्थिति में कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं। 
  • रीढ़ की हड्डी में होने वाली क्षति के कारण अक्सर पीठ-कमर दर्द बने रहना।
  • आपका शरीर झुक सकता है। 
  • हड्डियों के हल्की चोट से भी टूटने की समस्या। 
यदि आप रजोनिवृत्ति से गुजर रही हैं, कुछ महीनों से कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स ले रही हैं या यदि आपके माता-पिता में से किसी को इस तरह की समस्या रही है तो ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिमों के बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। 

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ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा - फोटो : iStock
किन लोगों में होता है ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा?

ऑस्टियोपोरोसिस या हड्डियों की समस्या किसी को भी हो सकती है, हालांकि कुछ स्थितियां आपमें इस रोग के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि  पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस विकसित होने की आशंका अधिक होती है। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ भी ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ जाता है। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ऑस्टियोपोरोसिस रह चुका है उन्हें कम उम्र से ही इस रोग से बचाव के लिए उपाय करते रहने की सलाह दी जाती है। 
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ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव के लिए करें उपाय - फोटो : istock
ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज और बचाव के तरीके

ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या में सबसे पहले हड्डियों को होने वाली क्षति का इलाज और इसे रोकने के लिए दवाएं और अन्य सहायक उपचार दी जाती है। आप लाइफस्टाइल को ठीक रखकर इस रोग के खतरे का कम कर सकते हैं। इसके लिए आहार और लाइफस्टाइल को ठीक रखने पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है। ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें जो हड्डियों को मजबूत बनाती हों। प्रतिदिन पर्याप्त कैल्शियम, विटामिन डी और प्रोटीन वाली चीजों का सेवन जरूरी है। 

हड्डियों की समस्याओं से बचाव के लिए शारीरिक सक्रियता जैसे योग-व्यायाम करते रहना बहुत आवश्यक माना जाता है। इसके अलावा सबसे आवश्यक है कि धूम्रपान और शराब का सेवन से दूरी बनाएं, ये आदतें हड्डियों को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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