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मेंटल हेल्थ डे: हंसता-बोलता इंसान भी हो सकता है डिप्रेशन का शिकार, हर बार चेहरे पर नहीं दिखती मानसिक परेशानी

Sat, 10 Oct 2026 01:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World Mental Health Day 2026: डिप्रेशन में हर व्यक्ति हमेशा उदास दिखाई दे, यह जरूरी नहीं। कुछ लोग हंसते-बोलते और रोजमर्रा के काम करते हुए भी मानसिक परेशानियों से जूझ रहे होते हैं। लगातार उदासी, काम में रुचि कम होना, थकान और नींद में बदलाव जैसे संकेतों पर ध्यान दें।
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डिप्रेशन की समस्याएं और खतरे - फोटो : Amarujala.com/AI
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती जा रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों से पता चलता है कि दुनियाभर में लगभग हर 7 में से 1 व्यक्ति मेंटल हेल्थ की समस्या का शिकार हो सकता है। यानी दुनियाभर में 1.2 अरब से ज्यादा लोग किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। स्ट्रेस-एंजाइटी से लेकर डिप्रेशन जैसी समस्याएं बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोगों में देखी जा रही हैं।

सामान्यतौर पर अगर कोई हंसता-बोलता है तो उसे देखकर हम मान लेते हैं कि वह खुश होगा, लेकिन जरूरी नहीं कि जो इंसान बाहर से खुश दिखाई दे, वह अंदर से भी अच्छा महसूस कर रहा हो।

मेंटल हेल्थ की समस्याओं में  कई बार लोग अपनी परेशानियां दूसरों से छिपाते हैं, सामान्य व्यवहार करते रहते हैं और किसी को अपनी भावनाओं का अंदाजा तक नहीं लगने देते। ऐसे में उनकी मानसिक तकलीफ को पहचानना मुश्किल हो सकता है। डिप्रेशन भी ऐसी ही एक समस्या है, जिसे केवल चेहरे के भाव या व्यक्ति के व्यवहार से पहचानना आसान नहीं होता। यह जरूरी नहीं कि डिप्रेशन से जूझ रहा हर व्यक्ति हमेशा उदास दिखाई दे या रोता रहे। 
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मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com
मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को लेकर अलर्ट
 
आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने, मानसिक समस्याओं से जुड़े कलंक को दूर करने और सही समय पर विशेषज्ञों की मदद लेने के लिए लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से हर साल 10 अक्तूबर को मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डिप्रेशन मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है, पर डिप्रेशन का शिकार हर व्यक्ति हमेश उदास दिखे ये जरूरी नहीं है। 

डिप्रेशन की समस्या के शिकार कुछ लोगों में थकान-चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या दिखाई दे सकती है। इसके अलावा कुछ लोगों में पहले पसंद आने वाली चीजों में रुचि कम होने जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। यही कारण है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को समझने के लिए किसी व्यक्ति की केवल मुस्कान नहीं, बल्कि उसकी भावनाओं और व्यवहार में लंबे समय से हो रहे बदलावों पर ध्यान देना भी जरूरी है।
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डिप्रेशन और इसके जोखिम - फोटो : Adobe stock photos
डिप्रेशन के मरीजों का उदास दिखना जरूरी नहीं

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनियाभर में लगभग 33.2 करोड़ लोग डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डिप्रेशन मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है, जो व्यक्ति की भावनाओं, सोच, व्यवहार और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित कर सकती है।
 
  • आमतौर पर लोगों की सोच रहती है कि डिप्रेशन का शिकार व्यक्ति हमेशा उदास या रोता हुआ दिखता है। हालांकि डिप्रेशन से जूझ रहे कई लोग दूसरों के सामने सामान्य व्यवहार करते हैं, काम पर जाते हैं, बातचीत करते हैं और हंसते भी हैं। इसका मतलब यह नहीं कि उनकी परेशानी कम है। 
  • बाहर से सामान्य दिखाई देने के बावजूद लोग अंदर से खालीपन, निराशा या भावनात्मक थकान महसूस कर सकते हैं।
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स्ट्रेस-डिप्रेशन के खतरे - फोटो : adobe stock images
फिर डिप्रेशन की पहचान कैसे की जाए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डिप्रेशन में हर किसी में एक जैसे लक्षण नहीं होते। हालांकि कुछ आम संकेत हैं जिसकी मदद से ये समझा जा सकता है कि कहीं कोई व्यक्ति मेंटल हेल्थ की समस्या का शिकार तो नहीं है?
 
  • पहले पसंद आने वाले कामों में रुचि कम होना।
  • लगातार उदासी, खालीपन या निराशा महसूस करना।
  • नींद बहुत कम या जरूरत से ज्यादा आना।
  • भूख और वजन कम या बहुत ज्यादा हो जाना।
  • थकान रहना और छोटे-छोटे कामों में भी मुश्किल महसूस होना।
  • खुद को बेकार समझना या हर काम में अपराधबोध महसूस करना।

मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं, अगर किसी व्यक्ति में उदासी, निराशा, रुचि की कमी या नींद में बदलाव लगातार बने हुए हैं और जीवन प्रभावित हो रहा है, तो मनोचिकित्सक से संपर्क करें। डिप्रेशन का इलाज मनोचिकित्सा और दवाओं से किया जा सकता है। समय पर लक्षणों की पहचान होने और इलाज मिलने से समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

अगर कोई व्यक्ति खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या करने की बात करे, तो इसे गंभीरता से लें। उसे अकेला न छोड़ें और तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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