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World Lung Cancer Day: इस गंभीर बीमारी के शुरुआती संकेतों को न करें नजरअंदाज, जानिए कैसे रहें इससे सुरक्षित?

Mon, 01 Aug 2022 01:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वर्ल्ड लंग कैंसर डे 2022 - फोटो : iStock
फेफड़े हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं। श्वसन क्रिया को सुचारू रूप से जारी रखने और शरीर के अंगों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचाने में फेफड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। फेफड़े, शरीर में ताजा ऑक्सीजन लाते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य अपशिष्ट गैसों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं, ऐसे में इस अंग में होने वाली किसी भी तरह की समस्या काफी गंभीर और घातक हो सकती है।

फेफड़ों का कैंसर ऐसी ही एक तेजी से बढ़ती गंभीर समस्या है, जिसके कारण हर साल लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ जाती है। फेफड़े के कैंसर के बारे में लोगों को जागरूक करने और इससे बचाव के बारे में सतर्क करने के लिए हर साल 1 अगस्त को वर्ल्ड लंग कैंसर डे मनाया जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, फेफड़ों का कैंसर एक घातक बीमारी है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, साल 2020 में फेफड़ों के कैंसर के कारण 18 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई, ऐसे में सभी लोगों को इसके खतरे को समझते हुए बचाव के उपाय करते रहने चाहिए। हालांकि ज्यादातर मामलों में जब तक स्थिति गंभीर नहीं हो जाती तब तक इसके लक्षण समझ नहीं आते हैं। फिर भी इस बीमारी से बचने के लिए आपको हमेशा अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। फेफड़ों के कैंसर के कुछ शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देकर इस गंभीर और जानलेवा समस्या से बचाव किया जा सकता है।
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फेफड़ों की बढ़ती समस्या - फोटो : iStock
फेफड़ों के कैंसर के क्या कारण हैं?

मेडिकल रिपोर्ट्स की मानें तो ज्यादातर फेफड़ों के कैंसर के लिए धूम्रपान को प्रमुख कारण माना जाता है। धूम्रपान करने वालों और सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आने वाले लोगों में भी इसका खतरा अधिक होता है। डॉक्टरों का मानना है कि धूम्रपान, फेफड़ों को लाइन करने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर का कारण बनता है। जब आप सिगरेट के धुएं को अंदर लेते हैं तो इसके कारण फेफड़े के ऊतकों में परिवर्तन होना शुरू हो जाता है। सिगरेट के धुंए में कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ (कार्सिनोजेन्स) पाए जाते हैं।
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फेफड़ों के कैंसर के संकेत - फोटो : iStock
ऐसे शुरुआती लक्षणों को न करें अनदेखा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं अगर शुरुआती लक्षणों पर समय रहते ध्यान दे दिया जाए तो फेफड़े के कैंसर को गंभीर रूप लेने से बचाया जा सकता है। यदि आपमें इस तरह की दो से अधिक समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो इस बारे में शीघ्रता से किसी चिकित्सक से संपर्क जरूर करें। 
  • लगातार बनी रहने वाली खांसी की समस्या।
  • खांसी के साथ खून आना।
  • सांस लेने में कठिनाई
  • छाती में दर्द
  • अक्सर आवाज बैठना।
  • वजन कम होते जाना।
  • हड्डी और सिरदर्द की समस्या बने रहना।

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धूम्रपान से कैंसर का खतरा - फोटो : istock
किन्हें होता है इसका अधिक खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कई कारक आपमें फेफड़ों के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं। अपने जोखिम कारकों को समझते हुए सभी लोगों को इससे बचाव के उपाय करते रहना चाहिए। धूम्रपान के अलावा रसायनों के अधिक संपर्क में रहने वाले लोगों में भी इसका खतरा हो सकता है। जिन लोगों के परिवार में किसी को पहले से ही इस तरह की समस्या रह चुकी हो, ऐसे लोगों में भी फेफड़े के कैंसर के विकसित होने का जोखिम हो सकता है।
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फेफड़ों को स्वस्थ रखने के करें उपाय - फोटो : istock
कैसे करें बचाव?

फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए सबसे पहली शर्त है कि आप धूम्रपान तुरंत बंद कर दें। यदि आप रसायनों की फैक्ट्री में काम करते हैं तो मास्क और बचाव के सभी उपकरणों का निरंतर प्रयोग करें। इनडोर प्रदूषण से बचाव करना भी बहुत आवश्यक माना जाता है, इसके लगातार संपर्क में रहने के कारण फेफड़ों की कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए स्वस्थ और पौष्टिक भोजन के साथ सांस वाले अभ्यास रोजाना करते रहें।


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स्रोत और संदर्भ
Lung cancer is the leading cause of cancer deaths worldwide.

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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