फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

World Liver Day 2023: लिवर की ये बीमारियां हो सकती हैं काफी गंभीर, समय पर पहचान और इलाज कराना बहुत जरूरी

Wed, 19 Apr 2023 10:27 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
लिवर की बीमारियां - फोटो : istock
लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। रक्त में मौजूद अधिकांश रसायनों की मात्रा को नियंत्रित करने के साथ अपशिष्ट उत्पादों को शरीर से बाहर निकालने में इस अंग की विशेष भूमिका होती है। पेट और आंतों से निकलने वाला सारा खून लिवर से होकर ही गुजरता है। लिवर पित्त का भी उत्पाद करता है जो भोजन के पाचन के लिए अति-महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि सभी लोगों को इस अंग के खास देखभाल की जरूरत होती है। लिवर की बढ़ती की बीमारियों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे मनाया जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार की गड़बड़ी के कारण शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग को बहुत क्षति पहुंची है। पिछले एक-दो दशकों में लिवर से संबंधित कई गंभीर रोगों के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे गए हैं। आश्चर्यजनक रूप से कम उम्र के लोग भी इसके शिकार देखे जा रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक लिवर से संबंधित तमाम बीमारियों के कारण वैश्विक स्तर पर हर साल 13 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। आइए लिवर की ऐसी ही कुछ गंभीर बीमारियों के बारे में जानते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज की दिक्कत - फोटो : iStock
फैटी लिवर डिजीज

फैटी लिवर डिजीज, इस अंग में अतिरिक्त फैट्स के जमा होने के कारण होने वाली एक सामान्य स्थिति है। अधिकांश लोगों में इसके कोई लक्षण नहीं होते हैं और यह उनके लिए गंभीर समस्याएं भी पैदा नहीं करता है। हालांकि कुछ मामलों में, यह लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज इसी का एक प्रकार है जिसके मामले काफी तेजी से बढ़े हैं, यह समस्या उन लोगों को भी हो सकती है जो शराब का सेवन नहीं करते हैं।

अच्छी खबर यह है कि, आप जीवनशैली में बदलाव के साथ फैटी लिवर की बीमारी की रोकथाम और इसे ठीक भी कर सकते हैं। 

दिल्ली के सीके बिरला अस्पताल के एडवांस सर्जिकल साइंस और ओंको-सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. अमित जावेद बताते हैं कि नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज जीवनशैली से संबंधित समस्या है, जो दुनियाभर में लगभग 30 फीसदी आबादी को प्रभावित करती है। भारत की सामान्य आबादी में इसका प्रसार 40 प्रतिशत तक है। साथ ही दिल्ली जैसे शहरों में मामले बढ़ सकते हैं।

भारत में नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का मुख्य कारण निष्क्रिय जीवन शैली और उच्च कैलोरी भोजन का सेवन है। मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और डिस्लिपिडेमिया NAFLD के लिए मुख्य जोखिम कारक हैं।
विज्ञापन

3 of 5
लिवर में संक्रमण हो सकता है गंभीर - फोटो : iStock
लिवर में संक्रमण की समस्या

लिवर में संक्रमण की समस्या भी काफी सामान्य है। हेपेटाइटिस वायरस के कारण लिवर में संक्रमण के मामले सबसे अधिक देखे जाते रहे हैं। हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, जैसे संक्रमण लिवर के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बनते हैं। इसके अलावा दूषित भोजन या पानी के कारण भी लिवर में संक्रमण होने का जोखिम रहता है। संक्रमण पर ध्यान न देना या फिर इसे अनुपचारित छोड़ देना लिवर डैमेज का भी कारण बन सकता है।

4 of 5
पीलिया की बीमारी - फोटो : istock
पीलिया-लिवर की बीमारी

पीलिया, जिसे हाइपरबिलिरुबिनमिया के रूप में भी जाना जाता है, यह भी असल में लिवर से संबंधित ही एक बीमारी है। यह अतिरिक्त बिलीरुबिन के एकत्रित होने के परिणामस्वरूप होने वाली समस्या है जिसमें त्वचा, आंखों का रंग पीला पड़ जाता है। बिलीरुबिन की सामान्य से अधिक मात्रा, लिवर या पित्त नली की समस्याओं का संकेत मानी जाती है। लिवर की इस बीमारी के मामले सबसे अधिक देखे जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
लिवर में हो सकता है कैंसर - फोटो : Pixels
लिवर कैंसर

लिवर कैंसर, एक जानलेवा स्थिति है। दुनियाभर में हर साल 8 लाख से अधिक लोगों में इस कैंसर का निदान किया जाता है और हर साल इसके कारण 7 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। लंबे समय तक हेपेटाइटिस बी या हेपेटाइटिस सी वायरस के संक्रमण का शिकार होने, अधिक वजन या मोटापे की स्थिति और शराब के सेवन के कारण लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इन जोखिम कारकों से बचाव के उपाय करें।


----------------
नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें