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वर्ल्ड हार्ट डे: हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समझने की न करें भूल, ऐसे समझें फर्क

Mon, 28 Sep 2026 05:15 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World Heart day: हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और कार्डियक अरेस्ट तीन अलग स्थितियां हैं। हार्ट अटैक में दिल तक खून का प्रवाह बाधित होता है, हार्ट फेलियर में दिल पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक प्रभावी तरीके से पंप करना बंद कर देता है।
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हार्ट की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
जिस तरह से दुनियाभर में दिल की बीमारी और इससे मौत के मामले बढ़ते जा रहे हैं, इसे देखते हुए किसी को भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता। डॉक्टर कहते हैं, लाइफस्टाइल-खानपान में गड़बड़ी के अलावा कुछ प्रकार के पर्यावरणीय और आनुवांशिक कारक सबसे ज्यादा खतरा बढ़ा रहे हैं। चूंकि हाल के वर्षों में बच्चों-किशोरों में भी हार्ट अटैक से मौत की खबरें सामने आई हैं, इसे ध्यान में रखते हुए कम उम्र से ही आपको निरंतर सावधानी बरतते रहने की जरूरत होती है।

जब बात दिल से जुड़ी गंभीर स्थितियों की होती है तो तीन नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं। हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और कार्डियक अरेस्ट। आमतौर पर लोग इन्हें एक ही समस्या मान लेते हैं, पर असल में ये तीनों बिल्कुल अलग-अलग समस्याएं हैं।

इन तीनों के दौरान दिल में होने वाली समस्या अलग होती है और इनके संकेत भी अलग-अलग हो सकते हैं।
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दिल की सेहत को लेकर सावधानी - फोटो : adobe stock images
दिल की बढ़ती बीमारियां 

कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के बारे में दुनियाभर में जागरूकता बढ़ाने और दिल की समस्याओं को लेकर कम उम्र से ही अलर्ट रहने के उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को 'वर्ल्ड हार्ट डे' मनाया जाता है। वर्ल्ड हार्ट डे 2026 का विषय है- "डॉन्ट मिस अ बीट"। इसमें दिल की बीमारी के छिपे हुए या हल्के स्तर के शुरुआती संकेतों को पहचानने पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आगे चलकर कोई गंभीर समस्या न हो। 

डॉक्टर बताते हैं,  हार्ट अटैक हो या हार्ट फेलियर या फिर कार्डियक अरेस्ट, तीनों में हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है।  इसलिए इनके बीच का अंतर समझना और समय रहते मरीज को डॉक्टर के पास पहुंचाना, जान बचाने वाले उपायों के लिए सबसे जरूरी है। 
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हार्ट अटैक की दिक्कत - फोटो : Adobe Stock
पहले हार्ट अटैक के बारे में जान लीजिए

हार्ट अटैक मुख्य रूप से रक्त प्रवाह की समस्या है। जब दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन युक्त खून पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनियों में रुकावट आती है तो दिल के हिस्सों में डैमेज शुरू हो जाता है। जितनी देर रक्त प्रवाह बाधित रहता है, दिल की मांसपेशी को उतना नुकसान हो सकता है।
 
  • हार्ट अटैक के कारण आमतौर पर लोगों को सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलने, ठंडा पसीने, मतली-चक्कर जैसी दिक्कत होती है।
  • दिल में होने वाला दर्द हाथ, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट तक फैल सकता है।
  • हार्ट अटैक अचानक नहीं होता, हमारे शरीर में लंबे समय से प्लाक जमा होकर धमनियों को ब्लॉक कर रहे होते हैं जो एक दिन हार्ट अटैक के रूप में सामने आती है।
  • हार्ट अटैक में तुरंत डॉक्टरी मदद की जरूरत होती है। जितनी जल्दी मरीज को आपात चिकित्सा मिल जाए उसके जान बचने की संभावना उतनी अधिक हो सकती है।

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हृदय रोगों की समस्या - फोटो : adobe stock photos
हार्ट फेलियर क्या है?

हार्ट फेलियर का मतलब यह नहीं है कि दिल ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया है। इसमें दिल शरीर की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त मात्रा में खून पंप नहीं कर पा रहा है। यह स्थिति समय के साथ विकसित हो सकती है और कई बार लंबे समय तक चलती है।
 
  • हृदय की मांसपेशियों के कमजोर होने, लंबे समय का हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और दूसरी हृदय संबंधी समस्याएं ये खतरा बढ़ा देती हैं।
  • इसके कारण आपको सांस फूलने, खासकर चलते या लेटते समय सांस लेने में परेशानी, पैरों या टखनों में सूजन, थकान जैसी दिक्कतें हो सकती है। 
  • कार्डियोमायोपैथी दिल की मांसपेशियों की बीमारी है जिसके कारण आपके दिल के लिए खून पंप करना मुश्किल हो सकता है।
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कार्डियक अरेस्ट में समय रहते दें सीपीआर - फोटो : Adobe Stock
कार्डियक अरेस्ट में क्या होता है?

कार्डियक अरेस्ट हार्ट अटैक से अलग है। इसमें दिल की विद्युत प्रणाली में गड़बड़ी के कारण दिल अचानक प्रभावी तरीके से धड़कना और खून पंप करना बंद कर देता है। इसमें मरीज अचानक गिर सकता है या बेहोश हो सकता है।
 
  • यह आपात स्थिति है। ऐसे व्यक्ति में तुरंत डॉक्टरी मदद जरूरी है।
  • जब तक डॉक्टर के पास न पहुंच सकें तब तक मरीज को सीपीआर देना उसकी जान बचाने में मदद कर सकता है।

हार्ट अटैक कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है, लेकिन दोनों एक ही स्थिति नहीं हैं। आसान भाषा में समझें तो हार्ट अटैक मुख्य रूप से खून के प्रवाह की समस्या है। कार्डियक अरेस्ट दिल की विद्युत गतिविधि की दिक्कत, जबकि हार्ट फेलियर दिल की पंपिंग क्षमता की समस्या है।





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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