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World Heart Day: क्या सिर्फ पुरुषों को ही होती है दिल की बीमारी? जानिए हृदय स्वास्थ्य को लेकर फैले कुछ मिथ्स

Mon, 29 Sep 2025 11:30 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हाल के अध्ययनों के अनुसार, 20-30 साल की उम्र के युवाओं में हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। यानी, दिल की बीमारी उम्र से नहीं बल्कि आपके खानपान, आदतों और शरीर की स्थिति से जुड़ी होती है।
  • हृदय रोगों से बचाव के लिए सही जानकारी होना सबसे जरूरी है। आइए हार्ट डिजीज को लेकर फैली कुछ अफवाहों के बारे में जानते हैं।
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हार्ट अटैक और हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Adobe stock photos
Heart Diseases: हृदय रोगों के बढ़ते मामले मौजूदा समय में सेहत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। विशेषतौर पर कम उम्र के लोगों का इसकी चपेट में आना सबसे चिंताजनक है।

हाल के आंकड़े बताते हैं कि 20 से कम उम्र के लोगों में न सिर्फ हृदय रोगों के मामले बढ़ रहे हैं, बल्कि हार्ट अटैक के कारण किशोरों की मौतें भी देखी जा रही हैं। शु्क्रवार (26 सितंबर) को ही साझा किए गए सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश में मासूमों के दिल की सेहत भी खतरे में है। 5-9 साल के एक तिहाई बच्चे हाई ट्राइग्लिसराइड्स का शिकार पाए गए हैं जो भविष्य में गंभीर हृदय रोगों का खतरा बढ़ाने वाले हो सकते हैं।

हृदय संबंधी रोगों (सीवीडी) के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और बेहतर खानपान-व्यायाम के माध्यम से हृदय स्वास्थ्य को ठीक रखने के उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे (विश्व हृदय दिवस) मनाया जाता है।

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि हृदय रोग 50 साल की उम्र के बाद होने वाली बीमारी है, पर आजकल खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड्स, तनाव और मोटापे की वजह से युवाओं और यहां तक कि बच्चों में भी हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। 

क्या आप अपनी दिल की सेहत को लेकर सावधानी बरतते हैं?
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हृदय स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : adobe stock images
हृदय रोग और इसका खतरा

हाल के अध्ययनों के अनुसार, 20-30 साल की उम्र के युवाओं में हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। यानी, दिल की बीमारी उम्र से नहीं बल्कि आपके खानपान, आदतों और शरीर की स्थिति से जुड़ी होती है।

जामा जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार सात साल तक की उम्र में जिन बच्चों में उच्च रक्तचाप की समस्या होती है, उनमें 50 की उम्र तक जाते-जाते हार्ट अटैक-हार्ट फेलियर जैसी स्थितियों के कारण मृत्यु का खतरा अधिक हो सकता है। यानी हृदय स्वास्थ्य को लेकर कम उम्र से ही अलर्ट हो जाना जरूरी है।

हृदय रोगों से बचाव के लिए सही जानकारी होना सबसे जरूरी है। आइए हार्ट डिजीज को लेकर फैली कुछ अफवाहों के बारे में जानते हैं।


(आपकी धमनियों में भी तो नहीं जम रहा है प्लाक? हो सकते हैं हार्ट अटैक का शिकार, ऐसे बरतें सावधानी)
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हार्ट अटैक का जोखिम - फोटो : Adobe stock photos
मिथ- मैं रोज एक्सरसाइज करता हूं, मुझे दिल की बीमारी नहीं होगी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हृदय को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम करना जरूरी है, लेकिन यह अकेला सुरक्षा कवच नहीं है। बहुत से फिट दिखने वाले लोग भी हार्ट अटैक का शिकार हो जाते हैं।

आनुवांशिक खतरे, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान या तनाव भी इस रोग को बढ़ाने वाली स्थितियां हैं। यानी, व्यायाम के साथ-साथ पौष्टिक डाइट, धूम्रपान से दूरी, स्ट्रेस कंट्रोल और नियमित चेकअप भी उतने ही जरूरी हैं।

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महिलाओं में हृदय रोगों के मामले - फोटो : Freepik.com
मिथ- दिल की बीमारी सिर्फ पुरुषों को होती है

यह धारणा भी गलत है कि सिर्फ पुरुष ही हृदय रोगों का शिकार होते हैं। महिलाओं में भी हृदय रोग का खतरा उतना ही है जितना पुरुषों में। फर्क सिर्फ इतना है कि महिलाओं के लक्षण अक्सर अलग और छुपे हुए होते हैं।

जैसे पुरुषों में सीने में दर्द की समस्या अधिक देखी जाती है वहीं महिलाओं को थकान, चक्कर, मतली की दिक्कत अधिक होती है। शोध बताते हैं कि भारत में हर 5 में से 2 महिलाएं हृदय रोग से प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए महिलाओं को भी नियमित जांच और सावधानी की जरूरत है।
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हृदय रोगों का खतरा कैसे कम करें? - फोटो : Freepik.com
मिथ- दिल की बीमारी का मतलब सीने में तेज दर्द होना

सीने में दर्द हार्ट अटैक का एक लक्षण है, लेकिन यही अकेला संकेत नहीं है। बहुत से लोग हार्ट अटैक के समय सिर्फ सांस फूलना, पसीना आना, चक्कर या जबड़े और पीठ में दर्द महसूस करते हैं। खासकर डायबिटीज के मरीजों में बिना दर्द के भी हार्ट अटैक हो सकता है। इसलिए हर असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।




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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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