Medically reviewed by-
डॉ शुभम अग्रवाल
हृदय रोग विशेषज्ञ
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल, काशीपुर
हृदय रोग, सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इसे दुनियाभर में होने वाली मौत के प्रमुख कारणों के रूप में भी जाना जाता है। एक आंकड़े के मुताबिक अकेले अमेरिका में 11 फीसदी पुरुष जबकि 9 फीसदी महिलाएं हृदय रोग की शिकार हैं। भारत के मामले में भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे बड़े खतरे के रूप में देखते आ रहे हैं। एक आंकड़े के मुताबिक जिस तरह से देश में हृदय रोग के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, यह भविष्य के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। इसी बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 29 सितंबर को 'विश्व हृदय दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
आंकड़ों के मुताबिक भारत में साल 1990 में हृदय रोगों से हर साल 2.26 मिलियन (22.6 लाख) की मौत होती थी, यह आंकड़ा साल 2025 तक बढ़कर 5.23 मिलियन (52.3 लाख) होने की आशंका है। पिछले कुछ दशकों में भारत में हृदय रोगों के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। ग्रामीण आबादी में हृदय रोगों के मामले 1.6 से बढ़कर 7.4 फीसदी जबकि शहरी आबादी में 1 से बढ़कर 13.2 फीसदी तक पहुंच गए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हृदय रोगों का अगर शुरुआत में ही पता चल जाए तो इसका इलाज और ठीक होने की संभावना अधिक हो सकती है। इसके लिए हृदय रोग के शुरुआती लक्षणों को पहचानना आवश्यक होता है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि किन लक्षणों के दिखने पर आपको सावधान हो जाने की आवश्यकता है?