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World Heart Day: हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या अंतर है, कैसे होती है मौतें?

Tue, 29 Sep 2020 07:31 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हृदय संबंधी समस्या (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
अनियमित दिनचर्या, तनाव, खान-पान में लापरवाही, पर्यावरण प्रदूषण और कई अन्य कारणों से वर्तमान समय में हृदय संबंधी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। न केवल बड़ी उम्र या बुजुर्गों में, बल्कि छोटी उम्र के बच्चों और किशोरों में भी दिल की समस्याएं बढ़ी है। दुनियाभर में हृदय के प्रति जागरूकता बढ़ाने और हृदय संबंधी समस्याओं से बचने के उपायों के बारे में बताने के उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। दिल के दौरे से दुनियाभर में अनगिनत मौतें होती हैं और 50 फीसदी मामलों में तो मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। कई बार मौतें हार्ट अटैक से होती हैं तो कई बार कार्डियक अरेस्ट मौत का कारण बनता है। ये दोनों अलग हैं। आइए जानते हैं दोनों के बारे में विस्तार से: 
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Heart Day 2020 - फोटो : पेक्सेल्स
  • सबसे पहले आपको बता दें कि विश्व हृदय दिवस मनाने की शुरुआत साल 2000 में की गई थी। उस वक्त यह तय किया गया था कि हर साल सितंबर के आखिरी रविवार को विश्व हृदय दिवस मनाया जाएगा। लेकिन 2014 में इसके लिए एक निश्चित तारीख निर्धारित कर दी गई और तब से हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाने लगा। दुनियाभर में बीमारियों से होनेवाली मौतों की एक अहम वजह हृदय रोग भी है, इसलिए इसके प्रति लोगों के बीच जागरूकता होनी जरूरी है। 
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हार्ट अटैक (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
हार्ट अटैक क्या होता है?
  • हार्ट अटैक के दौरान दिल के कुछ हिस्सों में ब्लड जम जाता है। ऐसे मामलों में भी इलाज मिलने में जितनी देर होगी, दिल और शरीर को उतना ज्यादा नुकसान होता चला जाएगा। इसमें लक्षण तुरंत भी दिख सकते हैं और देर भी हो सकती है। कार्डियक अरेस्ट की तरह हार्ट अटैक में दिल की धड़कन अचानक बंद नहीं होती। हार्ट अटैक आने के कुछ घंटों या कुछ दिनों बाद तक इसका बुरा असर देखने को मिलता है। 

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कार्डियक अरेस्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : social media
कार्डियक अरेस्ट क्या होता है?
  • कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में दिल के भीतर के हिस्सों में सूचनाओं का आदान-प्रदान गड़बड़ हो जाता है। इस कारण दिल की धड़कन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसमें जकार्डियोपल्मोनरी रेसस्टिसेशन (CPR) के जरिए पीड़ित के हार्ट रेट को नियमित और सुचारू करने की कोशिश की जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक हो चुका होता है, उन्हें कार्डियक अरेस्ट की ज्यादा आंशका रहती है। 
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कार्डियक अरेस्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
कैसे होता है कार्डिएक अरेस्ट?
  • स्वास्थ्य वेबसाइट heart.org के मुताबिक, कार्डियक अरेस्ट अचानक होता है। शरीर की तरफ से इसकी कोई चेतावनी नहीं मिल पाती। आम तौर पर दिल में होने वाली इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी के कारण धड़कन का ताल-मेल बिगड़ जाता है। इस कारण दिल की 'पम्प करने की क्षमता' पर प्रभाव पड़ता है और हमारे दिल, दिमाग या शरीर के दूसरे हिस्सों तक ब्लड पहुंच पाने में दिक्कत होती है। ऐसे में काफी कम समय में व्यक्ति बेहोश हो जाता है और नब्ज भी जाती रहती है। सही वक्त पर सही सपोर्टिव इलाज नहीं मिले तो कार्डियक अरेस्ट से कुछ मिनटों में ही मौत हो जाती है। 
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हार्ट अटैक (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
दोनों में गहरा जुड़ाव
  • कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक, दोनों ही आपस में गहरी जुड़ी हैं। कई बार हार्ट अटैक के दौरान या फिर उसकी रिकवरी के दौरान भी कार्डिएक अरेस्ट की संभावना रहती है। चूंकि हार्ट अटैक में दिल की धड़कन तुरंत बंद नहीं होती, इसलिए कार्डिएक अरेस्ट की तुलना में हार्ट अटैक में मरीज की जान बचाए जाने की संभावना कहीं ज्यादा होती है।
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हार्ट अटैक (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pixaby
ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के अनुसार, दिल में इलेक्ट्रिकल सिग्नल की समस्याएं शरीर में जब ब्लड नहीं पहुंचने देती तो कार्डियक अरेस्ट की स्थिति सामने आती है। इंसान का शरीर ब्लड को पंप करना बंद कर देता है तो दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इस स्थिति में व्यक्ति बेहोश हो जाता है और उसे सांस लेने में बहुत दिक्कत होने लगती है। इसके कोई लक्षण पहले से नहीं दिखते हैं। कार्डियक अरेस्ट में मौत होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 
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