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World Diabetes Day: जानलेवा हो सकती है डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की समस्या, इसके लक्षण-जोखिमों के बारे में जानिए

Mon, 14 Nov 2022 10:47 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : istock
डायबिटीज की स्थिति शरीर को कई प्रकार से गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है, कुछ स्थितियों में यह जानलेवा बीमारियों का कारण भी बन जाती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को डायबिटीज से बचाव करने और ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल में रखने की सलाह देते हैं। रक्त शर्करा का बढ़ना आंखों से लेकर किडनी, तंत्रिकाओं, लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों की क्षति का कारण बन सकता है। मधुमेह की ऐसी ही अनियंत्रित और गंभीर स्थिति है- डायबिटिक कीटोएसिडोसिस। डॉक्टर्स के मुताबिक इस समस्या पर समय रहते ध्यान न देना या इसका इलाज न हो पाना जानलेवा भी हो सकती है। इस तरह के खतरे को ध्यान में रखते हुए सभी मधुमेह रोगियों को इसके लक्षणों के बारे में ध्यान देते रहना चाहिए।

वैश्विक स्तर पर बढ़ते डायबिटीज के खतरे, जटिलताओं और इससे बचाव को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है। इस साल का थीम है- एजुकेशन टू प्रोटेक्ट टुमारो।

मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ वसीम गौहरी का कहना है कि जिस तरह से पिछले कुछ वर्षों में डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है, इसके जोखिमों के बारे में लोगों को जागरूक करना बहुत आवश्यक हो गया है। आइए जानते हैं कि यह किस तरह की जटिलता है और इससे बचाव के लिए क्या किया जाना चाहिए?
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डायबिटीज की समस्या और उपचार - फोटो : istock
डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के बारे में जानिए

डॉक्टर वसीम बताते हैं, डायबिटिक कीटोएसिडोसिस मधुमेह की एक गंभीर और जटिल स्थिति है। यह स्थिति तब विकसित होती है जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है।  पर्याप्त इंसुलिन के अभाव में शरीर फैट का ही ईंधन के रूप में ब्रेक डाउन करना शुरू कर देता है। इस स्थिति में रक्त में कीटोन्स नामक एसिड बढ़ने लग जाती है। यदि समय रहते इसपर कंट्रोल न किया जाए तो यह डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का कारण बन सकती है।

कई स्थितियां हैं जो इस समस्या को बढ़ावा दे सकती हैं, जैसे शारीरिक या भावनात्मक आघात, दिल का दौरा या स्ट्रोक, गर्भावस्था, शराब या नशीली दवाओं का अधिक सेवन आदि।
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डायबिटीज की गंभीर स्थिति के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay
डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के लक्षणों की पहचान जरूरी

मधुमेह के शिकार लोगों को शरीर में हो रहे बदलावों पर गंभीरता से ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है। डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के लक्षण काफी तेजी से नजर आने लगते हैं। समय पर इसकी पहचान और इलाज बहुत जरूरी माना जाता है।  मधुमेह केटोएसिडोसिस के लक्षण यूरिन टेस्टिंग किट्स की मदद से देखे जा सकते हैं। 
  • बहुत प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब आना
  • पेट दर्द होना
  • कमजोर या थका हुआ होना।
  • पेशाब में कीटोन्स का स्तर बढ़ना।
  • बार-बार यूटीआई की समस्या होना।
डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के कारण किडनी फेलियर के मामले सबसे अधिक देखे जाते रहे हैं, कुछ लोगों में यह लिवर से संबंधित गंभीर समस्याओं का कारण हो सकती है। ये दोनों ही समस्याएं गंभीर स्थिति में जानलेवा हो सकती हैं।

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डायबिटिक कीटोएसिडोसिस गंभीर स्थिति - फोटो : istock
डायबिटिक कीटोएसिडोसिस हो जाए तो क्या करें?

खून और पेशाब की जांच के माध्यम से कीटोन्स के स्तर का पता लगाने में मदद मिलती है, यदि आपमें डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के बारे में पता चलता है तो इसमें तुरंत डॉक्टरी सहायता ली जानी चाहिए। इंसुलिन थेरेपी और दवाइयों के माध्यम से डॉक्टर डायबिटीज को नियंत्रित करके संबंधित जोखिमों को कम करते हैं। यह आपात स्थिति मानी जाती है ऐसे में समय पर इलाज बहुत आवश्यक हो जाता है। इलाज में देरी या कीटोन्स का स्तर बढ़ना कई अंगों की क्षति का कारण बन सकता है।
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रक्त शर्करा का स्तर बढ़ने की समस्या - फोटो : istock
डायबिटिक कीटोएसिडोसिस से बचाव करते रहें

जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है और रक्त शर्करा का स्तर अक्सर बढ़ा हुआ रहता है उन्हें इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या को लेकर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है। इस तरह की गंभीर समस्याओं से बचाव के लिए डायबिटीज को कंट्रोल में रखना सबसे आवश्यक माना जाता है। समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराते रहें, यदि इंसुलिन ले रहें हैं तो इसमें किसी प्रकार की लापरवाही न करें। डॉक्टर की सलाह पर कीटोन्स के स्तर की जांच कराना भी जरूरी हो जाता है। 

मधुमेह की इस तरह की जटिलताएं गंभीर मानी जाती है, लेकिन अच्छा देखभाल करके इनसे बचाव किया जा सकता है। लक्षणों पर ध्यान देते रहें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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