एक्वार्ड इम्यून डेफिशियेंसी सिंड्रोम (एड्स) गंभीर बीमारी है जिसका जोखिम वैश्विक स्तर पर बढ़ता हुआ देखा गया है। असुरक्षित यौन संबंध, दूषित इंजेक्शन और संक्रमित व्यक्ति का खून चढ़ाने के कारण एचआईवी का संक्रमण हो सकता है। ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी वायरस (एचआईवी) का संक्रमण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है जिसके कारण गंभीर बीमारियों का जोखिम रहता है।
एड्स, अब भी लाइलाज बीमारी मानी जाती रही है। महामारी की शुरुआत के बाद से, 85.6 मिलियन लोग एचआईवी वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और लगभग 40.4 मिलियन लोग एचआईवी-एड्स से मारे जा चुके हैं। वैश्विक स्तर पर, 2022 के अंत तक 39.0 मिलियन लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में एड्स के उपचार के लिए वैज्ञानिक लगातार प्रयास कर रहे हैं। कुछ मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है एड्स के इलाज के लिए किए गए कुछ प्रयासों के अच्छे परिणाम देखे गए हैं। आइए इस बारे में जानते हैं।