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वर्क फ्रॉम होम: लोगों में तेजी से बढ़ रही है कमर और पीठ दर्द की समस्या, इन आसान उपायों से पा सकते हैं राहत

Fri, 16 Jul 2021 04:10 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वर्क फ्रॉम होम के कारण बढ़ी कमर दर्द की समस्या - फोटो : Social media
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)


दुनियाभर में डेढ़ साल से कोरोना संक्रमण का कहर जारी है। दिसंबर 2019 से शुरू हुए मामलों को रोकने और लोगों को इससे सुरक्षित रखने के लिए तमाम सरकारों ने लॉकडाउन का ऐलान कर दिया था। लॉकडाउन के चलते ऑफिस के काम घरों से होने शुरू हो गए। संक्रमण से लोगों को सुरक्षित रखने में यह उपाय अच्छा तो माना जा सकता है, लेकिन वर्क फ्रॉम होम के कारण लोगों में स्वास्थ्य संबंधी तमाम तरह की समस्याएं बढ़ गई है। कमर के निचले हिस्से में दर्द, ऐसी ही एक समस्या है जिससे ज्यादातर लोग इन दिनों बेहद परेशान हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठ कर काम करते रहने, शरीर की स्थिति काफी देर तक एक ही तरह की रखने के कारण लोगों में इस तरह की समस्या बढ़ गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि वर्क फ्रॉम होम कल्चर कोरोना के कारण, सप्ताह, महीनों और वर्षों में बदलता जा रहा है। मौजूद समय में घर से काम कर रहे ज्यादातर लोगों को कमर में दर्द की समस्या हो रही है, जो ऑफिस में काम करते समय उन्हें नहीं हो रही थी। घर पर काम करने के तरीके का बदल जाना, कमर को सहारा देने वाली कुर्सी न होना और शरीर की मुद्रा सही न होने के कारण लोगों को पीठ में दर्द की समस्या हो रही है।
आइए इस लेख में उन उपायों के बारे में जानते हैं जिनको प्रयोग में लाकर वर्क फ्रॉम होम के समय में कमर दर्द की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। 
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कमर को सपोर्ट देने वाली कुर्सी पर बैठें - फोटो : iStock
कमर को सहारा देनी वाली कुर्सी का प्रयोग करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि चूंकि कोरोना अब भी जारी है, यह कब तक रहेगा कुछ कहा नहीं जा सकता है। ऐसे में घर से काम करने वाले सभी लोगों के ऐसी कुर्सी का इस्तेमाल करना चाहिए जो आपके पीठ के निचले हिस्से को सहारा देती हों, ताकि रीढ़ अपने प्राकृतिक आकार में बनी रहे। लगातार सामने की तरह ज्यादा झुककर काम करने से रीढ़ के आकार में परिवर्तन हो जाता है जो कमर दर्द का प्रमुख कारण है। आप चाहें तो सहारा देने के लिए कुर्सी और कमर के बीच में तकिया लगाकर भी रख सकते हैं।
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काम के समय शरीर की स्थिति ठीक रखें - फोटो : iStock
काम करते समय ठीक तरीके से बैठें
काम करते समय ठीक से बैठना बेहद जरूरी है, आड़ा-तिरछा बैठने से शरीर की मुद्रा खराब हो जाती है जिसका सीधा असर पीठ और कमर के निचले हिस्से पर पड़ सकता है। इसलिए सुनिश्चित करें कि काम करते समय बैठने पर आपके पैर जमीन पर सपाट और आपकी पीठ सीधी रहे। इसके अलावा, सुनिश्चित करें कि आपके घुटनों का पिछला भाग कुर्सी को छू न रहा हो क्योंकि ऐसा होने से रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ सकता है।

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लैपटॉप की स्क्रीन रखें सामने - फोटो : Pixabay
लैपटॉप को सही से रखें
आपका मॉनिटर,आंखों से लगभग एक फुट की दूरी पर होना चाहिए। सुनिश्चित करें कि आपकी आंखें आपके मॉनिटर के ऊपरी हिस्से के समतल हों। मॉनिटर को देखने को लिए न तो आपको सिर को ज्यादा ऊपर करना पड़े न ही नीचे की ओर झुकाना पड़े। मॉनिटर देखने के लिए सिर को नीचे की ओर झुकाने से गर्दन के पीछे के हिस्से पर दबाव पड़ता है, जो रीढ़ और पीठ में दर्द का कारण बन जाता है। 
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शरीर की स्ट्रेचिंग करते रहें (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
काम के दौरान ब्रेक लेते रहें
वर्क फ्रॉम होम के समय में कमर दर्द की समस्या से बचे रहने के लिए सबसे जरूरी है कि काम के दौरान थोड़ी-थोड़ी देर पर जगह से उठकर ब्रेक लें, आसपास घूम लें। इस समय गर्दन को घुमाने वाले अभ्यास कर सकते हैं। मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग करते रहें जिससे शरीर के सभी अंगों में खून का संचार निरंतर बना रहे। स्ट्रेचिंग करते रहने से आपको ज्यादा लाभ मिल सकता है।  वर्क फ्रॉम होम कर रहे लोगों को नियमित रूप से व्यायाम जरूर करना चाहिए।

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नोट: यह लेख डॉ. परवेश मलिक के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।  

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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