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Health Tips: सुबह के नाश्ते की सबसे पसंदीदा ये चीज बन सकती है कई बीमारी का कारण, हो जाइए सावधान

Fri, 12 Sep 2025 10:00 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • व्हाइट ब्रेड नाश्ते का सबसे आसान विकल्प है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही सफेद ब्रेड आपके शरीर पर कितना बुरा असर डाल सकती है?
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खान-पान में करें सुधार - फोटो : Adobe stock photos
हर सुबह नाश्ते में आप किन चीजों का सेवन करते हैं? ब्रेड जैम, सैंडविच, ब्रेड टोस्ट?

नाश्ते में ये सबसे आसानी से बनने वाला विकल्प होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही सफेद ब्रेड आपके शरीर पर कितना बुरा असर डाल सकती है? दिखने में हल्की, नरम और स्वाद में मजेदार लगने वाली यह ब्रेड अंदर से आपके शरीर को धीरे‑धीरे गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

आहार विशेषज्ञ बताते हैं, व्हाइट ब्रेड मुख्य रूप से प्रोसेस्ड आटा (मैदा) से बनती है, जिसमें गेहूं के जरूरी पोषक तत्व जैसे फाइबर, विटामिन और मिनरल्स खत्म हो जाते हैं। ऐसे में लंबे समय तक इसे खाते रहने से ब्लड शुगर बढ़ने, मोटापा, हृदय रोग, पाचन समस्याओं और पोषक तत्वों की कमी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

अगर आप भी नाश्ते में व्हाइट ब्रेड यानी मैदे से बनी ब्रेड का सेवन करते हैं तो सावधान हो जाइए।
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व्हाइट ब्रेड खाने के नुकसान - फोटो : Adobe stock
व्हाइट ब्रेड वाली चीजें हो सकती हैं नुकसानदायक

आप सोच रहे होंगे कि इतनी साधारण चीज से इतना नुकसान कैसे हो सकता है? दरअसल, व्हाइट ब्रेड शरीर में तेजी से ग्लूकोज में बदल जाती है, जिससे आपको अधिक भूख लगती है जिससे वजन बढ़ने का खतरा हो सकता है। इसके अलावा व्हाइट ब्रेड में फाइबर बहुत कम होता है, जिससे इसका अधिक सेवन पाचन को प्रभावित करता है।

आहार विशेषज्ञ बताते हैं, व्हाइट ब्रेड का लंबे समय तक सेवन कई प्रकार की बीमारियों का कारण बन सकता है।
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व्हाइट ब्रेड का सेहत पर असर - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज वालों के लिए बहुत नुकसानदायक

व्हाइट ब्रेड बनाने में मैदा का इस्तेमाल होता है। मैदा तैयार करते समय गेहूं से फाइबर, विटामिन और मिनरल्स खत्म हो जाते हैं। यानी इसमें सिर्फ स्टार्च यानी शुद्ध कार्बोहाइड्रेट बचता है। जब आप नाश्ते में व्हाइट ब्रेड खाते हैं तो ये कार्बोहाइड्रेट तेजी से टूटकर ग्लूकोज में बदलते हैं। इससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ जाता है। बार-बार ऐसा होने से शरीर में इंसुलिन की समस्या होने लगती है।

यह टाइप-2 डायबिटीज वाले मरीजों के लिए खतरा बढ़ा सकती है। शोध बताते हैं कि अधिक मात्रा में प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट वाले आहार का सेवन करने वाले लोगों में डायबिटीज का जोखिम उन लोगों की तुलना में ज्यादा होता है जो साबुत अनाज खाते हैं।

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मोटापा का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com
मोटापे का हो सकता है जोखिम

व्हाइट ब्रेड में फाइबर और प्रोटीन की मात्रा बहुत कम होती है। जब आप कम फाइबर वाली चीजें खाते हैं तो कुछ ही समय बाद फिर से भूख लगने लगती है। इसका मतलब आप बार-बार खाना खाते हैं और अतिरिक्त कैलोरी शरीर में जमा होने लगती है। 

कई शोध में पाया गया है कि ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन से मोटापा बढ़ने का खतरा होता है। मोटापा न केवल शरीर के आकार को प्रभावित करता है, बल्कि हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
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हृदय रोगों का जोखिम - फोटो : Freepik.com
हृदय स्वास्थ्य पर भी होता है असर

व्हाइट ब्रेड को हृदय स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक माना जाता है। फाइबर शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिसकी इसमें मात्रा बिल्कुल कम होती है।

इसके अलावा शोध बताते हैं कि अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट वाले आहार का सेवन करने से ट्राइग्लिसराइड्स और बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है, जो हृदय रोगों का कारण बनता है।  व्हाइट ब्रेड का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी ज्यादा होता है, जिससे ब्लड शुगर में तेजी से उतार-चढ़ाव होता है। यह उतार-चढ़ाव रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है जिसके कारण भी आपको हृदय रोगों का खतरा रहता है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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