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Winter Health: ठंड के मौसम में थोड़ी सी भी लापरवाही ट्रिगर कर सकती है अस्थमा, बरतें ये सावधानियां

Sat, 21 Dec 2024 07:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तापमान में कमी और ठंडा वातावरण उन लोगों के लिए बहुत समस्याकारक है जिन्हें पहले से सांस की समस्या रही है। ठंडी, शुष्क हवा और अन्य कारक अस्थमा के लक्षणों को बिगाड़ने वाले हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि सर्दियों में अस्थमा से कैसे बच सकते हैं?
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अस्थमा की दिक्कत - फोटो : Freepik.com
सर्दियों का ये मौसम आपकी सेहत के लिए कई प्रकार की चुनौतियां बढ़ाने वाला हो सकता है। तापमान में कमी और ठंडा वातावरण उन लोगों के लिए और भी समस्याकारक है जिन्हें पहले से सांस की समस्या, जैसे अस्थमा या ब्रोंकाइटिस की दिक्कत रही है  ठंडी, शुष्क हवा और अन्य कारक अस्थमा के लक्षणों को बिगाड़ने वाले हो सकते हैं इसलिए इस मौसम में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए सर्दी का मौसम साल का सबसे मुश्किल समय हो सकता है। ठंडी-शुष्क हवा और मौसम में अचानक बदलाव आपके वायुमार्ग प्रभावित कर सकते हैं, जिसकी प्रतिक्रिया में आपका शरीर अधिक बलगम का उत्पादन करने लगता है। इस स्थिति में आपके लिए सांस लेना कठिन हो जाता है।

अस्थमा के लक्षण ट्रिगर न होने पाएं और आप किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य जटिलताओं से बचे रहें इसके लिए जरूरी है कि पहले से ही कुछ सावधानियां बरती जाएं। आइए जानते हैं कि अस्थमा के मरीज किन बातों का ध्यान रख सकते हैं?
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बच्चों में अस्थमा की दिक्कत - फोटो : Freepik.com
सर्दियों में अस्थमा ट्रिगर होने का खतरा

सर्दियों में अस्थमा की समस्या बढ़ने और लक्षणों के ट्रिगर होने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। डॉक्टर बताते हैं, आपके फेफड़े में स्थित वायुमार्ग में तरल पदार्थों की एक परत होती है जो इसे सुरक्षित रखने में मदद करती है। हालांकि ठंडी हवा के संपर्क में आने पर वायुमार्ग में सूजन और जलन हो जाती है। ठंडी हवा के कारण बलगम की परत मोटी भी हो जाती है जिससे आपको सामान्य सर्दी या फ्लू जैसे श्वसन संक्रमण होने की समस्या भी बढ़ जाती है।

ठंडी हवा के संपर्क में आने के कारण आपमें सीने में दर्द, खांसी, सांस फूलने, सीने में जकड़न और घरघराहट की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। ये समस्याएं अस्थमा रोगियों की जटिलताएं बढ़ा सकती हैं, इससे बचाव करते रहने बहुत आवश्यक है।
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सांस की समस्या - फोटो : Freepik.com
अस्थमा अटैक से बचने के लिए क्या करें?

सर्दियों में अस्थमा ट्रिगर होने से बचे रहने लिए दिनचर्या में कुछ बदलाव बहुत जरूरी हैं। सबसे जरूर ही ठंडी हवा से बचाव करना। सर्दियों में ठंडी हवा अस्थमा के अटैक का कारण बन सकती है। इससे बचे रहने के लिए बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ या मास्क से ढकें। सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के लिए प्रयास करें। इसके अलावा सर्दियों में घर में धूल और नमी बढ़ जाती है, जो अस्थमा के ट्रिगर का कारण बन सकती है, इससे बचाव करते रहना भी आवश्यक है। नियमित रूप से घर की सफाई करें।

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खान पान में करें सुधार - फोटो : Freepik.com
खानपान और व्यायाम पर ध्यान देना जरूरी

सही आहार अस्थमा को नियंत्रित रखने में मदद करता है। विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थ जैसे संतरा, नींबू, और हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं। इससे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा  गर्म पेय जैसे अदरक की चाय, तुलसी की चाय, या हल्दी वाला दूध पिएं। इससे सर्दी जैसे संक्रमण से बचाव होता है और श्वसन समस्याओं का खतरा कम होता है। 
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अस्थमा की समस्या - फोटो : Freepik
दवाइयां और इनहेलर पास रखें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को अस्थमा की दिक्कत रही हो उन्हें डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का नियमित रूप से सेवन करना जरूरी है। इसके अलावा हमेशा अपने साथ इनहेलर रखें। जरूरत महसूस होते ही तुरंत इनहेलर का इस्तेमाल करें। दवाओं से भी अगर समस्या में लाभ न मिल रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सांस की समस्याएं आपातकालीन स्थिति हैं इन्हें अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। 

सर्दियों में अस्थमा के मरीज यदि इन उपायों को अपनाते हैं, तो अपनी सेहत को बेहतर बनाए रख सकते हैं और अस्थमा के अटैक से बच सकते हैं। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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