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विसरल फैट: पेट की चर्बी कहीं आपके हार्ट के लिए न बढ़ा दे मुश्किलें? जानिए क्या है इसका कनेक्शन

Fri, 16 Oct 2026 06:19 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Visceral Fat Heart Disease: पेट के अंदरूनी अंगों के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी लिवर में फैट जमा होने, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम से इसके खतरों को कम किया जा सकता है। 
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बेली फैट की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
अधिक वजन और मोटापे की स्थिति को स्वास्थ्य विशेषज्ञ सेहत के लिए गंभीर खतरा मानते हैं। वजन ज्यादा होने के कारण सिर्फ आपका लुक ही खराब नहीं होता है, समय के साथ ये समस्या आपमें कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। यही कारण है कि डॉक्टर कम उम्र से ही सभी लोगों को अपने वजन पर ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं।

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अधिक वजन की स्थिति में पेट की चर्बी का बढ़ना सबसे ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। कई बार वजन ज्यादा नहीं दिखता, लेकिन पेट के आसपास चर्बी जमा होने लगती है, ये सबसे खतरनाक स्थिति है। पेट के अंदरूनी अंगों के आसपास जमा होने वाली चर्बी को विसरल फैट कहा जाता है।

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने जानकारी दी कि किस तरह से विसरल फैट की स्थिति फैटी लिवर रोग के खतरे का कारण बन सकती है। क्या आप जानते हैं कि इससे आपके दिल को भी खतरा हो सकता है?
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लिवर की बीमारी - फोटो : Adobe Stock
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, पेट की चर्बी का बढ़ना लिवर और दिल दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि पेट पर जमा अतिरिक्त चर्बी समय के साथ फैटी लिवर, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ लोगों का वजन सामान्य होने के बावजूद उनके पेट के आसपास ज्यादा चर्बी हो सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ शरीर का वजन चेक करते रहने के साथ कमर के आकार पर भी ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं।

पेट की चर्बी का लिवर पर असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पेट के अंदर जमा अतिरिक्त चर्बी शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है। इससे लिवर में फैट जमा होने और मेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़ी फैटी लिवर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। शुरुआत में अक्सर इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, लोगों को अपनी बीमारी का पता तब चल पाता है जब समस्या काफी बढ़ चुकी होती है।
 
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हृदय रोगों का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe Stock Images
हार्ट की समस्याओं का हो सकता है खतरा

अध्ययनों में पाया गया है कि पेट पर जमा अतिरिक्त चर्बी समय के साथ हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और इंसुलिन रेजिस्टेंस के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है। ये सभी दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देती हैं।
 
  • विसरल फैट बायोलॉजिकल संकेतों के जरिए हृदय रोग का कारण बनता है। ये संकेत रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और हृदय की मांसपेशियों पर दबाव डालते हैं।
  • विसरल फैट से ऐसे इन्फ्लेमेटरी केमिकल और साइटोकाइन रिलीज होते हैं जो पूरे शरीर और रक्त वाहिकाओं में लगातार हल्के स्तर की सूजन पैदा करते हैं।
  • इसके अलावा पेट के आसपास जमा चर्बी हाई कोलेस्ट्रॉल और ब्लड लिपिड में बदलाव का भी कारण बन सकती है। ये सभी स्थितियां एथेरोस्क्लेरोसिस का कारण बनती है, जिससे धमनियों के भीतर प्लाक का जमा होने लग जाती है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
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कमर की माप का भी रखें ध्यान - फोटो : Adobe stock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) नार्मल है, तब भी पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी हो सकती है। इसलिए वजन के साथ कमर के नाप पर भी ध्यान देते रहना जरूरी है। पुरुषों के लिए 90 सेंटीमीटर और महिलाओं के लिए 80 सेंटीमीटर की कमर की माप को सामान्य माना जाता है। वजन के साथ-साथ पेट की चर्बी को कम करने के लिए भी निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
 
  • नियमित रूप से तेज गति से वॉक और अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करें।
  • मीठे पेय, ज्यादा तली हुई चीजें और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन कम से कम करें।
  • डाइट में सब्जियों-फल, साबुत अनाज और प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ाएं।
  • अच्छी नींद लें और वजन-कमर, ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर की भी निरंतर जांच कराते रहें।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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