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MonkeyPox: संक्रमण की स्थिति को लेकर WHO ने दी बड़ी जानकारी, जानिए क्या है भारत में स्थिति?

Mon, 29 Aug 2022 02:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मंकीपॉक्स संक्रमण की स्थिति - फोटो : ANI
भारत सहित दुनिया के ज्यादातर देशों में मंकीपॉक्स का संक्रमण पिछले कुछ महीनों से जारी है। कोरोना की करीब ढाई साल से अधिक समय से जारी महामारी के बीच मंकीपॉक्स के मामले स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ाने वाले थे। हालांकि संक्रमण की रफ्तार में अब थोड़ी कमी आती देखी जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में एक बयान जारी करते हुए बताया कि पिछले सप्ताह वैश्विक स्तर पर दर्ज किए गए मंकीपॉक्स के मामलों में 21 फीसदी तक की गिरावट आई है, यह थोड़े राहत का संकेत है। एक महीने से लगातार संक्रमण के मामले बढ़े हुए रिपोर्ट किए जा रहे थे, फिलहाल पिछले हफ्ते के आंकड़े में संक्रमण में कमी आने की सूचना है। 

पिछले एक हफ्ते में मंकीपॉक्स के दुनियाभर में 5,907 नए मामले दर्ज किए गए हैं, ईरान और इंडोनेशिया में इसी सप्ताह संक्रमण का पहला केस देखा गया है। अप्रैल के अंत से अब तक 98 देशों में 45,000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।

भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां संक्रमण के नौ केस रिपोर्ट किए गए हैं। राजधानी दिल्ली में 5 लोगों को संक्रमित पाया गया था जिनमें से चार अब पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस संक्रामक वायरस से बचाव करते रहना सभी के लिए आवश्यक है। संक्रमण को काफी हद तक भारत में कंट्रोल कर लिया गया है। आइए मंकीपॉक्स के बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।
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डब्ल्यूएचओ के डीजी टेड्रोस एडहोम घेब्रेयस - फोटो : ANI
मंकीपॉक्स संक्रमण को लेकर विशेषज्ञों की सलाह

मई में यूरोप और उत्तरी अमेरिका में मंकीपॉक्स के प्रकोप की शुरुआत के बाद से डब्ल्यूएचओ और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों ने नोट किया था कि इसका प्रसार विशेष रूप से समलैंगिक पुरुषों के यौन संबंधों के कारण हो रहा है। डब्ल्यूएचओ की नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि 96% मामले समलैंगिक पुरुषों  में देखे गए हैं। मंकीपॉक्स के संक्रमण के लिए जिन कारकों को अब तक प्रमुख पाया गया है, यौन संबंध उनमें से एक है। स्वास्थ्य संगठन का कहना है इस जोखिम कारक को ध्यान में रखकर वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बने मंकीपॉक्स की रफ्तार को कम करने में मदद मिल सकती है।
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दिल्ली में मंकीपॉक्स का संक्रमण - फोटो : istock
दिल्ली में संक्रमण की स्थिति

दिल्ली में मंकीपॉक्स संक्रमण की स्थिति अब काफी हद तक नियंत्रित नजर आ रही है। 24 जुलाई को यहां संक्रमण का पहला मामला दर्ज किया गया था। राजधानी में अब तक कुल 5 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिनमें से चार अफ्रीकन मूल और एक दिल्ली का निवासी था। फिलहाल इनमें से चार लोग पूरी तरह से ठीक होकर घर लौट चुके हैं, शेष एक मरीज भी ठीक है और उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों में इस संक्रमण से बचाव को लेकर जागरूकता देखी जा रही है, यही कारण है कि मामलों में अन्य देशों की तुलना में उछाल नहीं आया है।

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मंकीपाॅक्स का संक्रमण कैसे फैलता है? - फोटो : istock
दिल्ली के संक्रमितों की रही है हेट्रोसेक्सुअल हिस्ट्री

आईसीएमआर की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि दिल्ली में मंकीपॉक्स के जो 5 केस सामने आए थे उनमें से तीन की हेट्रोसेक्सुअल हिस्ट्री रही है। बाकी दो की सेक्सुअल हिस्ट्री पता नहीं लग पाई है। हेट्रोसेक्सुअल का मतलब विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण से है। ऐसे में इस रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि संक्रमण के लिए समलैंगिकता को ही एक मापदंड नहीं माना जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दिल्ली में पाए गए संक्रमितों में से किसी के भी होमोसेक्सुअल होने से इनकार किया है, जो मंकीपॉक्स के मरीजों में सामान्यत: देखा जाता रहा है।
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मंकीपॉक्स संक्रमण के खतरे से करें बचाव - फोटो : WHO
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मंकीपॉक्स संक्रमण के लक्षण चेचक के समान होते हैं और इसमें बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगने जैसी स्थिति हो सकती है। संक्रमण के बढ़ने के साथ चेहरे, जननांगों, छाती और पीठ पर और हाथों-पैरों पर फफोले दिखाई देने लगते हैं। इस तरह के लक्षण यदि आपको भी महसूस हो रहे हों तो इस बारे में किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। लक्षणों का समय रहते पता चल जाने से स्थिति को समय पर नियंत्रित करना और गंभीर रोग से बचाव करना आसान हो जाता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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