अकेलापन मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या मानी जाती रही है, दुनिया की बड़ी आबादी इसकी शिकार है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते है, लंबे समय तक बनी रहने वाली अकेलेपन की समस्या न सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, इसके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर देखे जाते रहे हैं। दीर्घकालिक अकेलापन अवसाद, चिंता और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकती है। लोनलीनेस के कारण होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अकेलेपन को एक गंभीर 'वैश्विक स्वास्थ्य खतरे' के तौर पर वर्गीकृत किया है।
डब्ल्यूएचओ ने माना अकेलापन गंभीर स्वास्थ्य विकार के तौर पर उभरती स्थिति है, युवाओं में इसका जोखिम काफी तेजी से बढ़ा है। भारत सहित कई देशों में इसका खतरा हाल के वर्षो में काफी बढ़ा है, विशेषतौर पर कोरोना महामारी के बाद लोनलीनेस के कारण होने वाली मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की समस्या अब ज्यादा रिपोर्ट की जा रही है।