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Study: क्या आपमें भी खून की कमी है? वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट- खो सकते हैं दिमागी ताकत

Sat, 15 Jul 2023 12:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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खून की कमी से मस्तिष्क पर असर - फोटो : istock
शरीर में खून की कमी (एनीमिया) की समस्या स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। दुर्भाग्यवश भारतीय महिलाओं में इसका खतरा काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। एनीमिया के कारण थकान, कमजोरी जैसी सामान्य समस्याओं के साथ त्वचा के रंग में बदलाव और सांस की दिक्कतों का जोखिम भी देखा जाता रहा है। पर इसके दुष्प्रभाव यहीं तक सीमित नहीं हैं।

एक अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने एनीमिया के कारण मस्तिष्क की सेहत पर होने वाले गंभीर दुष्प्रभाव को लेकर आगाह किया है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि यदि आप खून की कमी के शिकार हैं और इसका सही से इलाज नहीं हो पा रहा है तो आप अपनी दिमागी ताकत खो सकते हैं।

अमेरिका में 65 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 10% लोगों को एनीमिया या उनके रक्त में आयरन की कमी का अनुमान है। शोधकर्ताओं ने पाया कि एनीमिया वाले लोगों में अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है। जरूरी है कि सभी लोग खून की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करने के लिए उपाय करते रहें।
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एनीमिया के कारण होने वाली समस्या - फोटो : istock
एनीमिया के कारण अल्जाइमर रोग का खतरा

अल्जाइमर रोग, मस्तिष्क स्वास्थ्य विकार है, जो समय के साथ चीजों को याद रखने, सोचने-तर्क करने और समस्याओं को हल करने की दिमागी ताकत को कम कर देती है। अल्जाइमर के गंभीर मामलों में डिमेंशिया का खतरा हो सकता है। एनीमिया वाले लोगों में इसके जोखिमों को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने तीन लाख से अधिक लोगों पर अध्ययन किया, जिसके आधार पर पाया गया कि खून की कमी के शिकार लोगों को समय के साथ अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया होने का खतरा 56 फीसदी तक अधिक हो सकता है।

एक अन्य अध्ययन में कैनसस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया गया कि एनीमिया वाले अल्जाइमर के रोगियों का मस्तिष्क सिकुड़ सकता है, जिससे बीमारी के बदतर होने का खतरा रहता है।
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अल्जाइमर रोगों का जोखिम - फोटो : iStock
मस्तिष्क की सेहत पर होने वाले दुष्प्रभाव

वैज्ञानिकों ने शोध के दौरान पाया कि ऐसे कई तरीके हैं जिनसे एनीमिया, मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है और दिमाग की कार्यात्मक क्षमता में कमजोरी का कारण बन सकता है।

एनवाईयू लॉन्ग आइलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन में प्रोफेसर एलिसन बी. रीस कहते हैं, अल्जाइमर रोग के परिणामस्वरूप तंत्रिकाओं में होने वाली क्षति के कारण स्मृति, सोचने की क्षमता और व्यवहार में परिवर्तन हो सकता है। आयरन की कमी मस्तिष्क की प्रक्रियाओं में बाधा पैदा कर सकती है जो न्यूरोट्रांसमीटर और माइलिन के उत्पादन और इनके सामान्य कार्यों को प्रभावित करती है। 

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मस्तिष्क से संबंधित समस्याओं का जोखिम - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

प्रोफेसर रीस कहते हैं, यदि किसी व्यक्ति को पहले से अल्जाइमर या डिमेंशिया की समस्या है तो एनीमिया के कारण लक्षणों के बिगड़ने का भी खतरा रहता है। शोध में पाया गया है कि एनीमिया मस्तिष्क में ग्लूकोज के मेटाबॉलिज्म को भी कम कर देती है, जो मस्तिष्क में ऊर्जा उत्पादन का तंत्र है। अल्जाइमर रोग के जोखिमों के लिए इसे भी एक कारक माना जा सकता है। सभी लोगों को कम उम्र से ही शरीर में खून की मात्रा बेहतर बनाने वाले प्रयास करते रहने चाहिए।
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एनीमिया के जोखिमों को करें कम - फोटो : Pixabay
भारतीय लोगों में एनीमिया का खतरा

एक अनुमान के मुताबिक आधे से अधिक भारतीय महिलाओं और तीन चौथाई बच्चों में खून की कमी हो सकती है। यह आंकड़े निश्चिच ही चिंताजनक है, क्योंकि एनिमिया न सिर्फ आपको कमजोर बनाती है साथ ही अल्जाइमर जैसे गंभीर रोगों के जोखिमों को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। पुरुषों में भी इसका खतरा हो सकता है, इसलिए जरूरी है कि आहार की पौष्टिकता का ध्यान रखा जाए और जो खून की कमी को दूर करने में आपके लिए सहायक हो सकता है। 



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स्रोत और संदर्भ
Associations of blood cell indices and anemia with risk of incident dementia


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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