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Sleep Paralysis: क्या आपको भी नींद में महसूस होता है 'भूत' का साया? जान लें क्या है इसके पीछे का मूल कारण

Wed, 28 Jan 2026 08:40 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

What is Sleep Paralysis: स्लीप पैरालिसिस एक सामान्य समस्या है, जो किसी को भी हो सकता है। खासतौर वो लोग इससे अधिक परेशान रहते हैं जिनके सोने जागने का समय निश्चित नहीं रहता है या फिर जो लोग पूरी नींद नहीं लेते हैं। आइए इस लेख में इसी समस्या के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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स्लीप पैरालिसिस - फोटो : Adobe Stock
Causes of Sleep Paralysis: अक्सर रात के सन्नाटे में अचानक नींद खुलने पर ऐसा महसूस होता है कि शरीर पूरी तरह पत्थर सा हो गया है। आप चिल्लाना चाहते हैं, हाथ-पांव हिलाना चाहते हैं, लेकिन ऐसा लगता है जैसे किसी भारी साये ने आपको जकड़ रखा है। सदियों से लोग इसे 'भूत' का साया या किसी बुरी शक्ति का हमला मानते आए हैं, लेकिन विज्ञान की भाषा में इस डरावने अनुभव को 'स्लीप पैरालिसिस' कहा जाता है। यह एक ऐसी अवस्था है जिसमें मस्तिष्क तो जाग जाता है, लेकिन शरीर की मांसपेशियां अभी भी गहरी नींद में रहती हैं।

दरअसल जब हम सपने देखते हैं, तो हमारा दिमाग शरीर को 'लकवाग्रस्त' कर देता है ताकि हम असलियत में हाथ-पांव न चलाएं। यह इसलिए होता है ताकि हम सपने में जो देख रहे हैं, उसे असलियत में न करने लगें (जैसे सपने में दौड़ रहे हैं, तो बिस्तर पर लात-पांव न चलाने लगें)। अब स्लीप पैरालिसिस की समस्या तब होती है जब जागने व सोने के बीच का संतुलन बिगड़ जाता है।
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स्लीप एप्निया खर्राटे लेना - फोटो : Adobe Stock
क्यों महसूस होते हैं डरावने साये और दबाव?
इसी विषय पर हमने ओडिशा के निजी अस्पताल के डॉक्टर रवि कुशवाहा से बात की। उन्होंने बताया कि स्लीप पैरालिसिस के दौरान मतिभ्रम होना बहुत सामान्य है। जब व्यक्ति जाग जाता है लेकिन हिल नहीं पाता, तो उसका मस्तिष्क 'फाइट या फ्लाइट' मोड में चला जाता है। अत्यधिक डर के कारण दिमाग आस-पास की छाया को किसी इंसान या साये के रूप में देखने लगता है। छाती पर भारी दबाव महसूस होना श्वसन मांसपेशियों के अस्थायी रूप से रिलैक्स होने के कारण होता है, जिसे प्राचीन लोककथाओं में 'चुड़ैल की सवारी' कहा जाता था।
 
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स्लीप पैरालिसिस - फोटो : Adobe Stock
स्लीप पैरालिसिस के पीछे की मुख्य वजहें क्या हैं?
डॉक्टर रवि कुशवाहा के मुताबिक ऐसा होने होने के पीछे का सबसे बड़ा कारण नींद की कमी और अनियमित 'स्लीप साइकिल' है। अत्यधिक तनाव, मानसिक चिंता, पीठ के बल सोना और कुछ विशेष दवाओं का सेवन इस स्थिति को बढ़ा सकता है। अगर आप शिफ्ट में काम करते हैं या आपका सोने का समय हर दिन बदलता है, तो मस्तिष्क और शरीर का तालमेल बिगड़ने की संभावना अधिक हो जाती है, जिससे स्लीप पैरालिसिस की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

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स्लीप पैरालिसिस - फोटो : Adobe Stock
इस डरावनी स्थिति से बचने के लिए क्या करें?
विज्ञान कहता है कि स्लीप पैरालिसिस जानलेवा नहीं है, केवल डरावना है। इससे बचने के लिए प्रतिदिन 7-9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेना जरूरी है। सोते समय करवट लेकर लेटने का प्रयास करें, क्योंकि पीठ के बल लेटने पर इसके मामले अधिक देखे जाते हैं। शाम के समय कैफीन और अल्कोहल से परहेज करें और सोने से पहले रिलैक्सेशन तकनीक या ध्यान का सहारा लें।

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स्लीप पैरालिसिस - फोटो : Adobe Stock
डर को विज्ञान से जीतें और डॉक्टर से परामर्श लें
स्लीप पैरालिसिस कोई अलौकिक घटना नहीं, बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल अवस्था है। देखा जाए तो इस विषय के बारे में सही जानकारी होना ही डर का सबसे बड़ा इलाज है। अगर यह समस्या बार-बार हो रही है और आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर रही है, तो यह 'नारकोलेप्सी' या किसी अन्य स्लीप डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से मिलें और अपने लक्षणों के बारे में विस्तार से बताकर परामर्श लें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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