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अलर्ट: क्या है मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम? जिसको लेकर डॉक्टर से लेकर आम लोग तक हैं टेंशन में, बच्चों को है इससे खतरा

Thu, 27 May 2021 04:28 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
डॉ. विपिन जैन 
बाल रोग विशेषज्ञ

Medically Reviewed by Dr. Vipin Jain

भारत देश पहले से ही कोरोना वायरस और फंगल इंफेक्शन जैसी बीमारी से लड़ रहा है। हर दिन इनके काफी केस सामने आ रहे हैं, और ये बीमारियां कई लोगों की जान भी ले रही है। लेकिन इन सबके बीच बच्चों को लेकर डॉक्टर्स और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम यानी MIS-C चिंता का विषय बन गया है और सबसे हैरानी की बात कि ये बच्चों को अपना शिकार बनाता है। डॉक्टर्स का कहना है कि ये कोरोना से संक्रमण होने के चार-छह सप्ताह बाद बच्चे के शरीर में आना शुरू हो जाता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।
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संक्रमित बच्चा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
क्या है MIS-C?
  • दरअसल, मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम यानी MIS-C होने का खतरा उन बच्चों में होता है, जो कोरोना वायरस महामारी से उबरे होते हैं और कई सप्ताह बाद इसे इन बच्चों में देखा गया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हालांकि, ये सिंड्रोम रेयर है और ये तब होता है जब कोरोना का संक्रमण खत्म हो जाता है और कोरोना के खिलाफ एक बच्चे के शरीर में एंटीबॉडी विकसित हो जाती हैं जो बच्चे के शरीर के आंतरिक अंगों में एलर्जी की प्रतिक्रिया देना शुरु कर देते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
बच्चों के इन अंगों को कर सकता है प्रभावित
  • डॉक्टर्स का मानना है कि वो नहीं कह सकते कि मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम कितना खतरनाक है, लेकिन वो ये जरूर कह सकते हैं कि संक्रमण निश्चित रूप से बच्चों को बुरी तरह से प्रभावित करता है। यही नहीं ये मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम बच्चों के हृदय, गुर्दे और लीवर को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डॉक्टर्स मानते हैं कि भले ही ये अभी रेयर है, लेकिन इसकी गहन जांच की जरूरत है ताकि समय रहते इसके बारे में अधिक जानकारी जुटाई जा सके। गौरतलब, है कि पहले कोरोना वायरस फिर फंगल इंफेक्शन और अब इस सिंड्रोम ने डॉक्टर्स से लेकर आम आदमी की चिंता को काफी बढ़ा दिया है।

नोट: डॉक्टर विपिन जैन बाल रोग विशेषज्ञ हैं, और एक जाना-माना नाम है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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