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Hypersomnia: जरूरत से ज्यादा सोना भी होती है समस्या, जानें किन बीमारियों का है शुरुआती लक्षण?

Wed, 18 Feb 2026 01:59 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Hypersomnia Symptoms And Causes: जरूरत से ज्यादा सोने की आदत हमारे सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। कई बार यह आदत शरीर किसी छिपी हुई बीमारी का शुरुआती संकेत होता है। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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नींद की समस्या - फोटो : Freepik.com
Excessive Daytime Sleepiness: हम सभी जानते हैं कि कम सोने से हमारे शरीर में कई तरह की समस्याएं होती हैं। मगर ध्यान देने वाली बात यह है कि जरूरत से ज्यादा सोना भी अच्छी आदत नहीं है। इसे चिकित्सा विज्ञान में 'हाइपरसोम्निया' कहा जाता है। अगर आम इंसान को 7-8 घंटे की नींद लेने के बाद भी नींद महसूस हो रही है या दिनभर आलस बना रहता है तो किसी आंतरिक बीमारी का संकेत भी हो सकता है।

दरअसल, जब मस्तिष्क का वह हिस्सा, जो हमें जगाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है, सही ढंग से काम नहीं करता, तो व्यक्ति कहीं भी काम के दौरान, बातचीत करते समय या ड्राइविंग करते समय भी सो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह मानसिक स्पष्टता, कार्यक्षमता और सामाजिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित करती है। इसे नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी शारीरिक और मानसिक जटिलताओं का कारण बन सकता है। इसलिए आइए इस लेख में इसे ठीक करने के बारे में जानते हैं।
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नींद की समस्या - फोटो : Freepik.com
हाइपरसोम्निया के पीछे के मुख्य कारण
हाइपरसोम्निया के पीछे कई शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल कारण हो सकते हैं। इसका एक प्रमुख कारण 'स्लीप एपनिया' है, जिसमें सोते समय सांस लेने में बार-बार बाधा आती है, जिससे नींद की गुणवत्ता खराब हो जाती है। इसके अलावा नार्कोलेप्सी, थायराइड की समस्या, और शरीर में विटामिन-D या B12 की भारी कमी भी अत्यधिक नींद का कारण बनती है।

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स्ट्रेस - फोटो : Adobe Stock
मानसिक स्वास्थ्य और नींद का संबंध
अत्यधिक नींद आना अक्सर गंभीर मानसिक रोगों का शुरुआती लक्षण होता है। 'डिप्रेशन' या एंग्जायटी से जूझ रहे लोग अक्सर बाहरी दुनिया से बचने के लिए या एनर्जी की कमी के कारण बहुत अधिक सोते हैं। इसे 'एटिपिकल डिप्रेशन' का एक संकेत माना जाता है। अगर नींद के साथ-साथ आपको उदासी और किसी काम में मन न लगने की शिकायत है, तो आपको अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है।

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नींद की समस्या - फोटो : Freepik.com
शरीर पर इसके नकारात्मक प्रभाव
जरूरत से ज्यादा सोने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे मोटापा, हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। हाइपरसोम्निया के शिकार लोगों में 'ब्रेन फॉग' की समस्या देखी जाती है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता और याददाश्त कमजोर होने लगती है। यह स्थिति शरीर के प्राकृतिक 'सर्कैडियन रिदम' को पूरी तरह बिगाड़ देती है, जिससे व्यक्ति को हमेशा सुस्ती और सिरदर्द महसूस करता है।
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मॉर्निंग वॉक जरूर करें - फोटो : Adobe Stock
निदान और जीवनशैली में सुधार
हाइपरसोम्निया को ठीक करना इसके मूल कारण पर निर्भर करता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो सबसे पहले एक 'स्लीप स्टडी' कराएं ताकि वास्तविक बीमारी का पता चल सके। अपनी दिनचर्या में व्यायाम शामिल करें, कैफीन का सेवन सीमित करें, शराब पूरी तरह छोड़ें और सोने का एक निश्चित समय तय करें। ध्यान रखें पर्याप्त नींद सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा सोना एक चेतावनी हो सकती है जिसे समय पर समझना जरूरी है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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