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HbA1c Test: डायबिटीज की सटीक जानकारी के लिए HbA1c टेस्ट, जानिए किसे करवानी चाहिए ये जांच

Mon, 11 Aug 2025 05:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • अगर आपको डायबिटीज है या इसके लक्षण दिख रहे हैं, तो डॉक्टर अक्सर एक टेस्ट का नाम लेते हैं वह है एचबीए1सी (HbA1c टेस्ट)। ये कोई साधारण ब्लड टेस्ट नहीं, बल्कि आपके पिछले 2-3 महीनों के ब्लड शुगर कंट्रोल की पूरी कहानी बताने वाला टेस्ट है।
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डायबिटीज की जांच - फोटो : Freepik.com
दुनियाभर में जिस तरह से कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है, ये निश्चित ही चिंता का विषय है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों के लिए जरूरी है कि आप अपने जोखिमों को जानिए और बचाव के लिए निरंतर उपाय करते रहिए। नियमित अंतराल पर कुछ प्रकार के जांच आपको कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाए रखने में मददगार हो सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 30 से अधिक उम्र के लोगों को डॉक्टर की सलाह पर हर छह महीने में शुगर की जांच जरूर कराते रहना चाहिए। अगर आपको डायबिटीज है या इसके लक्षण दिख रहे हैं, तो डॉक्टर अक्सर एक टेस्ट का नाम लेते हैं वह है एचबीए1सी (HbA1c टेस्ट)। ये कोई साधारण ब्लड टेस्ट नहीं, बल्कि आपके पिछले 2-3 महीनों के ब्लड शुगर कंट्रोल की पूरी कहानी बताने वाला टेस्ट है। इसे ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट भी कहते हैं।

डायबिटीज के निदान और इसके प्रबंधन के लिए इसे सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है, क्योंकि कुछ महीनों में शुगर के एवरेज का पता लगाने में मदद मिलती है।
 
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
क्या है इसका नॉर्मल रेंज?

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन की गाइडलाइन्स के अनुसार, अगर आपका HbA1c 5.7% से 6.4% के बीच है तो ये प्रीडायबिटीज का संकेत है। 6.5% या उससे ज्यादा की रिपोर्ट डायबिटीज की पुष्टि करता है। यानी कि अगर आपकी रिपोर्ट 5.7% से कम रहती है तो ये अच्छा संकेत है।
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डायबिटीज के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक अस्पताल में एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ अभिषेक सहायक बताते हैं, जिन लोगों का वजन ज्यादा है, हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, डायबिटीज की  फैमिली हिस्ट्री रही हो या गर्भावस्था के दौरान शुगर हो गया हो उन्हें अपने डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से ये टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। समय पर ये टेस्ट करवाने से डायबिटीज की जटिलताओं जैसे हृदय पर इसके असर, किडनी फेलियर और आंखों की रोशनी पर होने वाले असर को काफी हद तक रोका जा सकता है।

डॉ अभिषेक बताते हैं, इस टेस्ट के लिए सिर्फ खून का एक सैंपल लिया जाता है और रिपोर्ट में आपका औसत ब्लड शुगर प्रतिशत पता चल जाता है।  ये टेस्ट आपको ब्लड शुगर स्कोर देता है ताकि आप समय रहते सही कदम उठा सकें और डायबिटीज के कारण शरीर पर होने वाले अन्य जोखिमों को कम कर सकें।

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खून की जांच और डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
ये टेस्ट काम कैसे करता है?

हमारे खून में हीमोग्लोबिन नाम का प्रोटीन होता है, जो ऑक्सीजन ले जाने का काम करता है। जब खून में शुगर की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो उसका कुछ हिस्सा हीमोग्लोबिन से चिपक जाता है। ये टेस्ट मापता है कि आपके हीमोग्लोबिन का कितना प्रतिशत हिस्सा शुगर से जुड़ा हुआ है। चूंकि लाल रक्त कोशिकाएं करीब 3 महीने तक रहती हैं, इसलिए यह टेस्ट 2–3 महीनों का औसत शुगर लेवल बता देता है।
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डायबिटीज से बचाव - फोटो : Freepik.com
इन बातों का भी रखिए ध्यान

डॉक्टर कहते हैं, अगर आप पहले से डायबिटीज के मरीज रहे हैं, तो साल में 2-4 बार यह टेस्ट करवाने की डॉक्टर आपको सलाह दे सकते हैं। HbA1c की रिपोर्ट  कंट्रोल रहने से हार्ट, किडनी, आंख और नसों की बीमारियों का खतरा कम होता है।

हालांकि जिन लोगों में पहले से आयरन की कमी, खून की बीमारी या हाल ही में खून चढ़ाने जैसी स्थितियां रही हो उनका HbA1c टेस्ट रिपोर्ट गलत दिख सकता है। इस बारे में अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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