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Heatwave: 45 डिग्री तक हार्ट-फेफड़े और मस्तिष्क में होते हैं ये बदलाव, थोड़ी सी लापरवाही से हो सकती है मौत

Fri, 21 Jun 2024 12:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गर्मी के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : istock
देश के ज्यादातर राज्यों में जारी भीषण गर्मी-लू जानलेवा साबित हो रही है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक मार्च से 18 जून तक करीब 114 लोगों की मौत हो गई है और 41 हजार से अधिक लोगों में हीट स्ट्रोक का संदेह है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तेज गर्मी के कारण न सिर्फ हीट स्ट्रोक का खतरा रहता है बल्कि बढ़ती गर्मी शरीर के कई अंगों को गंभीर क्षति भी पहुंचा सकती है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया, जैसे-जैसे तापमान बढ़ता जाता है इससे संपूर्ण स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने बताया, हमारा शरीर एक नियत ताप सहन करने की ही क्षमता रखता है। सामान्यतौर पर हमारा शरीर 43-45 डिग्री तापमान को कुछ समय तक सहन कर सकता है, हालांकि जैसे-जैसे इसमें बढ़ोतरी होती जाती है, इसके कई प्रकार के दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

आइए जानते हैं कि तापमान के 45 और इससे अधिक होने की स्थिति में शरीर पर किस प्रकार से असर होता है?
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बढ़ते तापमान के दुष्प्रभाव - फोटो : istock
दिल्ली सहित कई राज्यों में भीषण गर्मी

दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में इन दिनों भीषण गर्मी का प्रकोप है।  कुछ जगहों पर तापमान 45-47 डिग्री तक पहुंच गया है, इसलिए हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और गर्मी से होने वाली अन्य बीमारियों से बचने के लिए कदम उठाना जरूरी है। उच्च तापमान शरीर के लिए घातक हो सकता है। इससे मस्तिष्क, हृदय, किडनी को नुकसान पहुंच सकता है।

आइए जानते हैं कि पारा 45 डिग्री से ऊपर जाने की स्थिति किस तरह से हानिकारक है?
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हाइपरथर्मिया और इसके कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : istock
हाइपरथर्मिया के हो सकते हैं शिकार

गुरुग्राम स्थित एक अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के डॉ. अभय गोयल बताते हैं कि 45 डिग्री सेल्सियस (113 डिग्री फारेनहाइट) से ज्यादा तापमान के संपर्क में आने से शरीर पर गंभीर और संभावित रूप से जानलेवा प्रभाव पड़ सकता है। अत्यधिक गर्मी के संपर्क में लंबे समय तक रहने से शरीर का तापमान खतरनाक रूप से बढ़ जाता है, जिसके परिणामस्वरूप हाइपरथर्मिया हो सकता है। 

हाइपरथर्मिया असामान्य रूप से शरीर का तापमान बहुत बढ़ जाने की स्थिति है। यह तब होता है जब आपका शरीर क्षमता से अधिक गर्मी सोख लेता है या गर्मी को बाहर नहीं कर पाता है। इसके कारण शरीर का तापमान बहुत अधिक हो सकता है।

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हृदय स्वास्थ्य पर असर - फोटो : istock
हृदय प्रणाली पर बढ़ता है दबाव

जब शरीर लंबे समय तक उच्च तापमान के संपर्क में रहता है, तो इसके कारण आप हीट एग्जॉशन के शिकार हो सकते है। इसके कारण कमजोरी, चक्कर आने, मतली और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए तो इससे हीट स्ट्रोक का खतरा हो सकता है।

उच्च तापमान हृदय प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे हृदय संबंधित समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। जिन लोगों को पहले से ही हार्ट की समस्या रही है उनमें अधिक गर्मी की स्थिति हार्ट अटैक-स्ट्रोक के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
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अस्थमा की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Freepik
ट्रिगर हो सकती हैं सांस की समस्याएं

तेज गर्मी के कारण हवा में गर्मी तो बढ़ती ही है साथ ही ये वायु की गुणवत्ता को खराब कर सकती है। खराब वायु गुणवत्ता श्वसन तंत्र के लिए समस्याकारक है। इससे अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी स्थितियों के बढ़ने या इसके ट्रिगर होने का भी खतरा हो सकता है। जिन लोगों को पहले से अस्थमा जैसी सांस की समस्याएं हैं उन्हें गर्मी के दिनों में और अधिक सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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