फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एनीमिया: कहीं आपमें भी तो नहीं हो गई है खून की कमी? जानिए नाखून देखकर कैसे लगा सकते हैं पता

Fri, 16 Oct 2026 07:15 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Anemia Risk Assessment: आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया में नाखून कमजोर होने, आसानी से टूटने या चम्मच जैसे आकार के हो सकते हैं। हालांकि, नाखूनों के बदलाव के कई अन्य कारण भी हैं। लगातार थकान, चक्कर या सांस फूलने पर आयरन की जांच कराएं। 
विज्ञापन
1 of 4
nails - फोटो : Amarujala.com
खून की कमी यानी एनीमिया की समस्या लोगों में बहुत कॉमन है, खासकर भारतीय महिलाओं में ये दिक्कत सबसे ज्यादा देखी जा रही है। आंकड़ों से पता चलता है कि देश की करीब 57% महिलाएं और किशोरियां एनीमिया से पीड़ित हो सकती हैं।

आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करती है। जब शरीर में पर्याप्त आयरन नहीं होता, तो हीमोग्लोबिन बनाने में परेशानी होती है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद वह प्रोटीन है, जो शरीर तक ऑक्सीजन पहुंचाता है। इसकी कमी होने पर लोगों में थकान, कमजोरी, सांस फूलने और त्वचा के पीला पड़ने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एनीमिया की समस्या भले ही कॉमन है पर अगर समय रहते इसपर ध्यान न दिया जाए या फिर इलाज न हो पाए तो इसके कारण गंभीर समस्याओं का भी खतरा हो सकता है।

क्या आप जानते हैं कि नाखूनों में होने वाले बदलावों को देखकर भी एनीमिया का पता लगाया जा सकता है? कैसे, आइए जान लेते हैं।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 4
खून की कमी और एनीमिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
नाखून देते हैं एनीमिया का संकेत

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, एनीमिया के कारण थकान-कमजोरी के अलावा कुछ लोगों में नाखूनों में भी बदलाव देखने को मिलते हैं। नाखूनों की कमजोरी से लेकर इसके रंग में बदलाव के आधार पर एनीमिया की पहचान की जा सकती है। 

हालांकि नाखूनों में दिखने वाले बदलाव को हर बार एनीमिया का संकेत नहीं माना जा सकता। फंगल संक्रमण, चोट और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी इस तरह की दिक्कतें हो सकती हैं इसलिए बीमारी का पता लगाने के लिए एनीमिया के दूसरे लक्षणों पर भी ध्यान देते रहना जरूरी है।
 
  • मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया में कुछ लोगों के नाखून कमजोर हो सकते हैं। 
  • नाखूनों की कमजोरी कई बार इतनी बढ़ जाती है नाखून आसानी से टूटने  या परतों में अलग होने लग सकते हैं। 
विज्ञापन

3 of 4
नाखूनों में दिखने वाले बदलाव - फोटो : Adobe Stock
नाखूनों का रंग और बनावट पर दें ध्यान

एनीमिया की समस्या के कारण त्वचा में पीलापन दिखाई देना एक आम लक्षण है। कभी-कभी नाखूनों के आसपास या नाखूनों के रंग में भी ऐसा बदलाव नजर आ सकता है। 
  • ऑक्सीजन से भरपूर लाल रक्त कोशिकाओं के कारण नाखूनों के नीचे की त्वचा और ऊतक आमतौर पर गुलाबी दिखते हैं। हालांकि जह हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने लगता है तो यह रंग फीका पड़ जाता है। इसके कारण आपको नाखूनों के नीचे का हिस्सा पीला या सफेद दिखाई दे सकता है।

नाखून के आकार में बदलाव

एनीमिया के कारण कई लोगों में कोइलोनिकिया की भी समस्या हो सकती है। इसमें नाखून बीच से दबा हुआ और किनारों से ऊपर उठा हुआ दिखाई दे सकता है, जिससे उसका आकार चम्मच जैसा लगता है। यह आयरन की कमी का संकेत हो सकता है। इस तरह के बदलाव के साथ अगर आपको अक्सर थकान-कमजोरी और चक्कर आने जैसी दिक्कतें हो रही हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर खून की जांच जरूर करा लें।
विज्ञापन

4 of 4
पौष्टिक चीजों का करिए सेवन - फोटो : Freepik.com
कब हो जाएं सावधान?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एनीमिया की स्थिति शरीर को कई तरह से प्रभावित करने वाली हो सकती है, इसलिए सिर्फ नाखूनों में दिखने वाले बदलाव के आधार पर समस्या की पहचान नहीं की जा सकती है।  अगर नाखूनों में बदलाव के साथ लगातार थकान, चक्कर, सांस फूलने, दिल की धड़कन तेज होना या त्वचा के पीला पड़ने जैसी समस्याएं महसूस हों तो डॉक्टर से सलाह लें। 
 
  • एनीमिया का पता लगाने के लिए आमतौर पर कम्प्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) किया जाता है। 
  • जिन लोगों में एनीमिया की समस्या होती है डॉक्टर उन्हें आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, बीन्स आदि खाने की सलाह देते हैं। 
  • विटामिन-सी वाले खाद्य पदार्थ आयरन के अवशोषण में मदद कर सकते हैं।
  • आयरन की गंभीर कमी की स्थिति में डॉक्टर आयरन की गोलियां लेने की भी सलाह दे सकते हैं, हालांकि कभी भी खुद से कोई सप्लीमेंट नहीं शुरू करना चाहिए।



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें